हिंदी दिवस पर साहित्यकारों का ‘सम्मान

जावरा ( अभय सुराणा). हिंदी ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं इसने विद्रोह भी देखा है और विप्लव भी देखा है ।इसने ठकुराइन मीरा को कृष्ण के भजन में लीन होते देखा तो वही सूर को संत सूरदास बनते भी इस हिंदी में देखा है।हिंदी ने स्वामी दयानंद सरस्वती को सत्यार्थ प्रकाश में उनके पांडित्य के लिए सादर वंदन किया है।

उक्त विचार सुंदरलाल जोशी ‘सूरज’ नागदा ने जावरा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा हिन्दी दिवस (14/9/25) पर आयोजित समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन में कही। ‌इस अवसर पर आयोजित काव्य संध्या में सुंदरलाल जोशी सूरज ने सरस्वती वंदना की मधुर प्रस्तुति दी। मुख्य अतिथि डा लक्ष्मीनारायण सत्यार्थी, विशेष अतिथि पत्रकार कैलाश सनोलिया, एवं राकेश मिश्रा का हिंदी साहित्य में अपने अवदान के लिए शाल और मोती माला से सम्मानित भी किया गया।

जावरा के वरिष्ठ पत्रकार श्री जगदीश राठौर का भी पत्रकारिता में उनकी अनवरत सेवा हेतु सम्मानित किया गया ।कवि सुंदरलाल उपाध्याय, गोपाल सुनहरे ,कृष्णचंद्र पुरोहित , फ़ज़लहयात, मनोहरसिंह चौहान, विजय जैन, श्रीमती लक्ष्मी जोशी ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में श्री कानसिंह जी चौहान , डा श्रीमती ज्योति उपाध्याय, डॉ शशि मेहता , प्रोफेसर सुरेश मेहता ,आ प्रोफेसर पालीवाल ,अनिल पावेचा , छोटेखान ,राम चाचलानी ,अभय श्रीवास्तव ,दिलीप सेठिया एवं अन्य साहित्य प्रेमी उपस्थित थे । परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश उपाध्याय ने स्वागत उद्बोधन दिया,और हिंदी गीत की सु मधुर प्रस्तुति दी। संचालन कवि राजेंद्र श्रोतिय ने किया। आभार संस्था के वरिष्ठ श्री बाबूलाल नाहर ने माना जिनका जन्म दिन सोलास संघवी की उपस्थिति में मनाया गया।