विनय के अभाव में सिखा ज्ञान भी जीवन के लिए संकट विपत्ति पैदा करके अभिशाप बन सकता है- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

भीनमाल । विनय के अभाव में सिखा ज्ञान भी जीवन के लिए संकट विपत्ति पैदा करके अभिशाप बन सकता है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने 72 जिनालय जैन उपाश्रय में धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि सभी धर्मों के भगवान उपासना ग्रंथ अलग हो सकते हैं लेकिन विनय को सभी ने एक स्वर मैं धर्म का प्रवेश द्वार बताया है। उन्होंने कहा कि झुकना जिंदगी पहचान है अकडऩा मुर्दे की पहचान है विनय ही जीवन का सच्चा सिंगार है ।
मुनि कमलेश ने बताया कि उपकारी के प्रति अंत: करण से बिना शर्त समर्पित होना विनायक का प्रतीक है । राष्ट्रसंत संत ने कहा कि किसी का अविनय करना साक्षात परमात्मा का अपमान करने के समान है । जैन संत ने कहा कि जाति पद प्रतिष्ठा का नही का नहीं गुणों विनय होना चाहिए मूर्तिपूजक आचार्य श्री रत्नाकरसूरी श्वर जी आचार्य प्रवर श्री रत्न संचय सुरीश्वर जी ठाणे 13 मुनि कमलेश का ज्वलंत समस्याओं पर विचार-विमर्श हुआ ।

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