
भीलवाड़ा (सुनिल चपलोत) । माणिक्य नगर भीलवाड़ा मानव की कामानाएं ही जीवन के दुखः का मूल कारण है पद लुप्ता मोह माया के चक्कर मे इंसान ही अपनी देह का सबसे बड़ा दुश्मन बन रहा है अपने शरीर को सुख देने के लिये न जाने कितने पाप करता है जबकि शरीर नश्वर है चितंन और मनन करने.वाला व्यक्ति ही अपने जीवन का लक्ष्य पाकर संसार के बंधनो से मुक्त हो पायेगा जगतगुरू स्वामी रामदयाल ने मंगलवार को रामद्वारा मे महाप्रभु रामचरण जी महाराज के 301 वे प्राकट्य महोत्सव के तृतीय दिवस आयोजित सत्संग मे उपस्थित हजारों श्रध्दालूओ से यह बात सत्संग के दौरान कहां ! जहाजपुर से संत ललितराम ने कहां कि अवगुणों छोड़कर सदगुणो को अपनाने वाला व्यक्ति सुख को प्राप्त कर पायेगा ! खाचरोल से पधारे संत रामानुज महाराज ने कहां कि महाप्रभु रामचरण जी महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव मात्र के उत्थान और जन कल्याण के लिये समर्पित कर दिया था ! संत भंडारी हरशुकराम महाराज ने.संचालन करते हुये कहां कि महापुरुषों नाम लेने से जीवन के कष्ट दुर हो जाते है ! राजेन्द्र पोरवाल ने भजन के द्वारा भावना प्रकृट की ! सुनिल चपलोत जानकारी देते हुये बताया कि इस दौरान रामद्वारा ट्रस्ट के जगदीश सोमनी,महावीर बाल्दी, अशोक अजमेरा, रमेशचन्द्र राठी ,पारसमल पीपाड़ा पदाधिकारियों ने महोत्सव मे पधारे हुये अतिथियों स्वागत किया !