अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में शिक्षा क्षेत्र से संबंधित घोषणाओं का स्वागत करता है। यह बजट शिक्षा को केवल डिग्री-केंद्रित ढांचे से आगे बढ़ाकर अनुसंधान, कौशल, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और नवाचार से जोड़ने की स्पष्ट दिशा प्रस्तुत करता है। शिक्षा क्षेत्र के लिए ₹1.39 लाख करोड़ का ऐतिहासिक आवंटन किया गया है। महासंघ का मानना है कि शिक्षा बजट में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि सरकार के विकसित भारत के संकल्प को मजबूती प्रदान करती है।
बजट में विद्यालयी शिक्षा के लिए ₹83,561.41 करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.35 प्रतिशत की वृद्धि है, जबकि उच्च शिक्षा के लिए ₹55,724.54 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो कि 11.28 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। पिछले पाँच वर्षों में शिक्षा पर केंद्र सरकार का प्रावधान वित्तीय वर्ष 2021 के ₹84,219 करोड़ से बढ़कर इस वर्ष ₹1.39 लाख करोड़ तक पहुँचना शिक्षा क्षेत्र में नीति-निरंतरता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसे महासंघ राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के लक्ष्यों की पुष्टि के रूप में देखता है।
बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग एवं कॉमिक्स) कंटेंट लैब्स की घोषणा युवाओं को डिजिटल एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही बड़े औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक कॉरिडोर के निकट 5 एकीकृत यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने का प्रस्ताव शिक्षा, शोध, कौशल और उद्योग के समन्वय को सुदृढ़ करेगा। प्रत्येक जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना हेतु लगभग ₹10,000 करोड़ की प्रस्तावित योजना महिला छात्रों की उच्च शिक्षा में भागीदारी और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सराहनीय पहल है।
बजट में 10,000 नई मेडिकल सीटें इसी वर्ष प्रारंभ करने तथा अगले पाँच वर्षों में 75,000 सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, 1.5 लाख केयरगिवर्स के प्रशिक्षण और 10 नई एलाइड हेल्थ डिसिप्लिन्स की शुरुआत स्वास्थ्य-शिक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन सृजन को गति देगी। साथ ही बजट में प्रस्तावित एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज स्टैंडिंग कमेटी शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ यह अपेक्षा करता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्यों के शैक्षिक संस्थानों को आधारभूत संरचना, शिक्षकों की रिक्तियों की पूर्ति, शिक्षक-प्रशिक्षण तथा आवश्यक शैक्षणिक सुविधाओं के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि समग्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का संकल्प पूर्ण रूप से साकार हो सके।
सर्वेश कुमार माथुर सहसगठन.म न्त्री
उज्जैन सभाग उज्जैन
सेवानिवृत्त उच्च श्रेणी शिक्षक
महामंत्री रतलाम
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ