पुरूषार्थ की भावना से प्राणी मात्र की सेवा से ही प्रभु दर्शन होते हैं -सुजानमल कोचट्टा

जावरा (अभय सुराणा) । पुर्व भव के पुण्य योग से मानव जन्म मिलता है और मनुष्य जन्म के लिए तो देवता भी तरसते हैं। यदि पुनः मनुष्य जन्म प्राप्त करना है तो निस्वार्थ भाव से पुरूषार्थ की भावना से हमें प्राणी मात्र की सेवा का भाव रखना चाहिए। गुरु भगवंत कहते हैं कि दुःखी एवं पीड़ित मानव की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है गौमाता में तो साक्षात देवताओं का वास होता है गौमाता की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है।
उक्त विचार जीवदया सोसायटी पर गौमाता के स्वामी वात्सल्य हरि धास व गुड के लाभार्थी जैन सौश्यल ग्रुप सीनियर सिटीजन के अध्यक्ष एवं समाजसेवी नवनीत सिंह श्रीमाल के जन्म दिन पर उनका स्वागत अभिनन्दन करते हुए समाजसेवी व ग्रुप के वरिष्ठ मार्गदर्शक सुजानमल कोचट्टा ने व्यक्त किए।
अपने स्वागत के जवाब में ग्रुप के अध्यक्ष नवनीत सिंह श्रीमाल ने कहा कि यह मेरा स्वागत नहीं बल्कि सम्पूर्ण ग्रुप के सदस्यों का स्वागत है मैं तो सिर्फ नीमित मात्र हुं आप हम सब मिलकर पुरूषार्थ की भावना से प्राणी मात्र की सेवा के इस महायज्ञ में बढ़ चढ़कर सेवा का संकृल्प लेंगे तो ही हम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।
जीव दया के अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रुप के सदस्यों क्रमशः उपाध्यक्ष पारसमल छाजेड, सुशील जैन, सचिव अशोक ओरा, कोषाध्यक्ष जवाहरलाल श्री श्रीमाल, संचालक मण्डल के सदस्य क्रमशः डॉ सुरेश मेहता, दिलीप पारख, अशोक चोपड़ा पत्रकार, प्रकाश पटवारी, वीरेन्द्र वीनाक्या, दिलीप चण्डालिया पारसमल ओरा, कनेश मेहता, प्रकाश कोठारी, राजेन्द्र कोचर, विनोद चपडोद, नेमीचंद जैन, सुभाष तलेरा, विमल सिसोदिया, शान्तिलाल डांगी, मदनलाल धारीवाल, धर्मवीर श्रीमाल आदि ग्रुप के सदस्यों ने दुपट्टे व मोतियों की माला से अध्यक्ष नवनीत सिंह श्रीमाल का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन अशोक चोपड़ा ने किया उक्त जानकारी ग्रुप के मीडिया प्रभारी पत्रकार पारसमल छाजेड ने दी।

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