
इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । कर्म युग के प्रणेता प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव जी और उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रथम चक्रवर्ति भरत जिनके नाम से भारत देश का नाम भारत पड़ा। चेत्र वदी नवमी को भगवान आदिनाथ जी का कल्याणक महामहोत्सव है इस दिन पुरे विश्व में भारतोत्सव या भारत दिवस के रूप में मनाया जाए।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह मांग समाज की वरिष्ठ समाजसेवीका श्री मति पुष्पा पांड्या ने देश की महामहिम राष्ट्र पति द्रौपदी जी मुर्मू, प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी व अनेक प्रांतों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि कर्म युग के प्रारंभ कर्ता छ: कर्मों की शिक्षा के द्वारा कोशल की शिक्षा देकर जीवन जीने की कला सिखाने वाले ७२ कला के प्रणेता जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी और उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रथम चक्रवर्ती सम्राट भरत जिनके नाम से भारत देश का नाम “भारतवर्ष “पड़ा ।वे छ : खंड के अधिपति ९ निधि और चौदह रत्न के धारी थे । भरत जी का जन्म भी अयोध्या नगरी में उनके पिता ऋषभ देव जी के जन्म कल्याणक दिन चेत्र बदी नवमी के दिन हुआ । जो इस वर्ष १२ मार्च को है ।इस दिन को भारतोत्सव के रूप में पुरे भारत में मनाया जाए ।
(२) कार्यक्रम आयोजित कर भरत जी व ऋषभ देव जी के जीवन पर व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की जाए ।
(३) उनके जीवन पर आधारित पाठ ,पाठ्य पुस्तकों में पढ़ाए जाए ।
(४) भरत चक्रवर्ती जी की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा अयोध्या में स्थापित की जाए।
इस दिन पशु वध व मांस विक्रय केंद्र बंद हो और रेल, हवाई जहाज , होटल्स, ढाबो, व ठेलों आदि पर भी मांसाहारी खाद्य सामग्री बनाने व परोसने बेचने पर पाबंदी लगाई जाए ।
श्रीमती पांड्या ने कहा कि इससे पूर्व भारत देश ऋषभ देव जी के पिता और भरत जी के दादाजी राजा नाभिराय जी के नाम से “ अजनाभ वर्ष “ कहलाता था ।
शकुंतला पुत्र भरत के नाम से देश का नाम भारत हुआ ये कहना सर्वथा गलत है ।इस आशय की जानकारी को पाठ पाठ्य पुस्तकों से हटाए जाए ।
शकुंतला पुत्र भरत की कहानी महाभारत के समय की है ।जो जैन धर्म के २२ वे तीर्थंकर नेमिनाथ जी के समय की बात है ।जबकि हजारों हज़ार साल पूर्व से ही हमारे देश का नाम भारत है ।भारत सिर्फ़ एक नाम ही नहीं बल्कि हमार सांस्कृतिक धरोहर है, विरासत है जो हमारी प्राचीनता और ऐतिहासिकता को परिलक्षित करती है ।भरत के भारत की इस संस्कृति ने विश्व को अहिंसा, प्रेम,करुणा नैतिकता, सहअस्तित्व व शांति का मार्ग प्रशस्त किया है ।
श्रीमती पांड्या की इस मुहिम का समर्थन करते हुए श्री दिगम्बर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मनींद्र जी जैन,अखिल भारत वर्षीय दिगम्बर जैन महिला परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्मला जी जैन,अखिल भारतीय दिगम्बर जैन महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शेखर जी छाबड़ा, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन हंसमुख गांधी टीके वेद नरेंद्र वेद मंयक जैन एवं मंजू अजमेरा राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष महासमिति, फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल बरखा बडजात्या राष्ट्रीय प्रबुध मंच , विजया पहाड़िया, पुष्पा कटारिया, इन्द्रा अजमेरा,मीना गोदरे अनीता बडजात्या महासमिति इंदौर, सुमन जैन अध्यक्ष पलासिया महिला मंडल एवं श्रीमती रेखा जैन श्रीफल श्रीमती मुक्ता जैन आदि देश की अनेक संस्थाओं ने इस अभियान में पुरजोर कार्य प्रारंभ कर दिया है । वे सभी अपने स्तर पर हस्ताक्षर अभियान चला कर व ई मेल कर देश भर में भारत उत्सव मनाए जाने की माँग कर रहे हैं । जिससे देश की प्राचीनता और नामकरण की सही जानकारी के साथ सांस्कृतिक महोत्सव “आदि भरतोत्सव “मनाया जाए ।