



अराकोनम एसएस जैन संघ 17 फरवरी। अभावग्रस्त व्यक्ति भूख, बीमारी, से तड़पता रहे अबोल मुक प्राणी दर-दर भटकता रहे,और हम एश आराम में डूब कर उसे तरफ आंख उठा कर भी नहीं देखना संवेदनहीनता की पराकाष्ठाता है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि विश्व के सभी धर्म का प्राण संवेदना है जो प्राणी मात्र के लिए अंतर मन में निस्वार्थ भाव से प्रकट होती है वह धरती पर चलता फिरता तीर्थ है l उन्होंने कहा कि प्रभु को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है वह तो भावों के भूखे हैंl उन का निवास अभावग्रस्त लोगों में है उनकी सेवा करना परमात्मा की सेवा से बढ़कर मानी जाती है l
मुनि कमलेश ने बताया कि इंसान को छीन कर ले लेगा, कर्ज कर लेगा, क्षेत्र छोड़कर चला जाएगा, लेकिन अबोल प्राणी अपनी व्यथा भी व्यक्त नहीं कर सकता भीषण गर्मी में दाना पानी और घास के अभाव में दम तोड़ देते हैं lजो किसी ने किसी रूप में हमारी अनंत उपकारी हैं उनकी सुरक्षा हमारी नैतिक जिम्मेदारी है l राष्ट्र संत ने कहा कि इंसान तो खाकर भी नमक हराम हो जाएगा स्वार्थ निकलने पर पहचानने से भी मना कर देगा,l लेकिन किसी भी पशु जगत के ऊपर थोड़ा सा भी सहयोग किया वह मौका आने पर अपनी जान की बाजी लगा करके आपकी रक्षा करेगा l जैन संत ने कहा कि हम उनकी सेवा करके उन पर ऐसा नहीं कर रहे हैं l बल्कि अपने पुण्य का झोला भर रहे हैं वह आपका कल्याण में सहयोगी बन रहे हैं l
मुनि कमलेश के मार्मिक प्रवचन से प्रभावित होकर जैन संघ अराकोनम ने मुनि कमलेश के 70 जन्मदिन पर जैन दिवाकर मरुधर केसरी गणेश रूप रजत पक्षी टावर बनाने का संकल्प लिया तत्काल 7 लाख की राशि दान दातों ने प्रदान की अन्ना अन्नदान का भी सफलतम आयोजन किया। संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता निर्मलचंद गैलड़ा कॉन्फ्रेंस के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री विमल धारीवाल इंदर चंद धारीवाल पदम सकलेचा जयचंद कटारिया ने गुरुओं का अभिनंदन किया। 18 फरवरी का प्रवचन यहीं पर होगा