होली चातुर्मास पूर्ण करने के पश्चात गुरुदेव ने नीमचौक से जैन दिवाकर स्मारक सागोद रोड़ पर विहार किया
रतलाम । प्रवचनकार वाणी के जादूगर, आगमज्ञाता, दक्षिण भास्कर पूज्य गुरुदेव डॉ.समकितमुनि जी म.सा. रतलाम नगर में प्रथम बार पधारे और होली चातुर्मास रतलाम को प्रदान किया। लगभग 15 दिन तक ज्ञान गंगा बहाई ।
होली चातुर्मास पूर्ण करने के पश्चात गुरुदेव नीमचौक से जैन दिवाकर स्मारक सागोद रोड़ पर विहार किया। स्मारक पंहुचकर गुरुदेव ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन के कुछ महत्वपूर्ण सूत्र उपदेश के रूप में प्रदान किये। जो बात बात में भिड़ता है । उसे कभी न कभी नरक की भीड़ में शामिल होना ही पड़ता है । जिसको बाँटना नही आता उसके हिस्से में मोक्ष नही आता है। आग केवल माचिस से नही लगती है शब्दों से भी लग जाती है। आग केवल पानी से नही बुझती शब्दों से भी बुझ जाती है।
जिस दिन शकुनि आपके भीतर जिंदा हो गया उस दिन जिंदगी से सुकून गायब हो जाएगा। जिंदगी शान से जीना चाहते हो तो घरवालों को परेशान करना छोड़ दो।
जितना आसान दुसरो को समझाना है उतना ही मुश्किल स्वंय को समझना है । जो केवल अपना सुख चाहता है वह दुर्योधन होता है और जो अपनों का सुख चाहता है वो युधिष्ठिर कहलाता है। छोटी छोटी बातों को तानों मत । अगर छोटी बातों को तानोगे तो परिवार में तनाव होना ही है।
संघ प्रवक्ता ने बताया की गुरुदेव अगले 2/3 दिन स्मारक पर विराजमान रहेंगे, 1 अप्रैल को रतलाम से जावरा की और विहार सम्भावित है। गुरुदेव ने पिछले 4 वर्ष में लगभग 7000 किमी का विहार किया है । 2017 में आपका चातुर्मास चैन्नई में हुआ वँहा से आप कन्याकुमारी गए फिर 2018 चातुर्मास मैसूर, 2019 नासिक, 2020 बेंगलोर और इस वर्ष 2021 का चातुर्मास चित्तौडग़ढ़ में होना तय है। गुरुदेव उत्तर से दक्षिण फिर दक्षिण से उत्तर की और विहार कर रहे है। आपका मानना है की संत को हमेशा गतिमान रहना चाहिए जैसे पानी बहता हुआ अच्छा रहता है वैसे ही संत भी चलता हुआ ही अच्छा रहता है ।