क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का विकार युक्त रंग आत्मा का पतन करते हैं- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

आबू रोड (जैन स्थानक भवन ) । पर्व हमारी संस्कृति के प्राण है जो समूह रूप में राजा और रंक झोपड़ी से महलों तक जाति पंथ ऊंच नीच की दीवारों से ऊपर उठकर मानवीय एकता को मजबूत करते हैं । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने आबू रोड जैन स्थानक भवन में होली के दूसरे दिन आध्यात्मिक रंग महोत्सव को संबोधित करते कहा कि राष्ट्रीय एकता अखंडता में पर्वों का ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण योगदान है
उन्होंने कहा कि कलर थेरेपी आज विज्ञान भी सिद्ध कर दिया है शरीर में रोगों का असंतुलन होने पर रोगों के शिकार हो जाते हैं ।
मुनि कमलेश ने कहा कि क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का विकार युक्त रंग आत्मा का पतन करते हैं। संस्कारों का दिवाला निकालते हैं रिश्तो में कटुता फैलती है ।
जैन संत ने कहा कि आत्मा को करुणा, मैत्री, वात्सल्य रंग से ओतप्रोत कर देंगे तो हर कदम हमारे लिए तीर्थ बन जाएगा।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि विश्व के सभी महापुरुषों ने नफरत करने वाले से भी प्रेम करने का संदेश दिया महासती भक्ति प्रभा जी कहा कि सद्भाव के रंग से आत्मा ओतप्रोत होगी तभी धर्म में प्रवेश होगा । राष्ट्रसंत के करुणामय वाइब्रेशन से इंसान तो क्या पशुओं पर प्रभाव पड़ता ही हम साक्षात देख रहे हैं मराठी आदमी महाराष्ट्र से दर्शन के लिए आया और आपको देखते ही एक एकड़ जमीन गोशाला देने के लिए तैयार हो गया। घनश्याम मुनि, गौतम मुनि ने विचार व्यक्त किए । अरिहंत मुनि अक्षत मुनि अक्षत मुनि ने मंगलाचरण किया ।

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