- तीर्थंकर ऋषभदेवजी द्वारा प्रवर्तित प्राणाहुति पर केन्द्रीत ध्यान सत्र का आयोजन
- ‘‘दाजी’’ का जैन दर्शन के प्रति अमूल्य योगदान – एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप



रतलाम, 22 मार्च। सुक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम मंत्री एवं वर्ल्ड जैन कॉन्फेडरेशन के चैयरमेन चेतन्य काश्यप ने हार्टफुलनेस केन्द्र रतलाम के सहयोग से श्रीजी पैलेस में तीर्थंकर ऋषभदेवजी द्वारा प्रवर्तित प्राणाहूति पर आधारित ध्यान की अनुभूति का विशेष सत्र आयोजित किया। इसमें हार्टफुलनेस संस्था के वैश्विक मार्गदर्शक पद्म भूषण श्री कमलेश डी.पटेल ‘‘दाजी’’ ने विशिष्ट ध्यान की अनुभूति कराई। उन्होंने इससे पहले कहा कि जैनत्व सभी धर्मों का मूल है। तीर्थंकर ऋषभदेवजी का भगवान राम की 73वीं पीढ़ी का रिश्ता रहा है। वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आदि शक्ति को प्रस्तुत किया। प्राणाहुति की विद्या उनके जाने के बाद विलुप्त हो गई थी, जिसे हमारे आदि गुरू ने खोजा और प्रस्तुत किया।
‘‘दाजी’’ ने ध्यान सत्र से पूर्व विस्तार से ध्यान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी चीज को अपनाने से पूर्व 100 बार उसका परीक्षण करना चाहिए और परीक्षण हो जाए तो फिर उसमें पूरी तरह समायोजित हो जाना चाहिए। चेतना की विभिन्न अवस्थाओं को इंगित करते हुए ‘‘दाजी’’ ने कहा कि हर चीज के साईड इफेक्ट होते है इसलिए उन्हें समझकर निर्विकार रूप से ध्यान को जीवन में आचरण करना चाहिए। सुबह का समय ध्यान, शाम का प्रतिक्रमण और रात्रि प्रार्थना के लिए होती है। भगवान ने ध्यान से केवल्य प्राप्त किया और सबको सीख दी कि वे भी ध्यान करें और केवल्य प्राप्त करे लेकिन इससे पहले धर्म और आध्यात्म को समझना जरूरी है। धर्म मान्यता सिखाता है और आध्यात्म अनुभूति कराता है। अनुभूति न होती तो कोई आध्यात्म की ओर नहीं जाता।
सुक्ष्म, लघु, एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप ने आरंभ में स्वागत भाषण देते हुए कहा कि ‘‘दाजी’’ का सानिध्य मिलना रतलाम का सौभाग्य है। जैन तीर्थंकरों ने जिस ध्यान परंपरा के साथ केवल्य को प्राप्त किया, ‘‘दाजी’’ उसी को आगे बढ़ाकर समृद्ध कर रहे है। जैन दर्शन के प्रति ‘‘दाजी’’ का अमूल्य योगदान सबके लिए प्रेरणा का कारण बनेगा। ‘‘दाजी’’ ने प्रकृति से ताल-मेल के अनुकरणीय प्रकल्प भी प्रस्तुत किए है, जो भारत की संस्कृति को मजबूत कर रहे है। उन्होंने कहा कि रतलाम के शिवगढ़ क्षेत्र में हार्टफुलनेस संस्था 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में वन विकास कर रही है और जैन दर्शन में 84 लाख जीवों की परिकल्पना करते हुए जीवदया को जो महत्व दिया गया है उसे ‘‘दाजी’’ का हर प्रकल्प आत्मसात कर रहा है। ‘‘दाजी’’ को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने ‘‘होली तीर्थंकर्स’’ पुस्तक के प्रकाशन के लिए चुना है। यह पुस्तक जैनत्व के सभी मानकों को प्रस्तुत करती है।
मंत्री श्री काश्यप ने किया ‘‘होली तीर्थंकर्स’’ पुस्तक का स्थानीय विमोचन
ध्यान सत्र से पूर्व ‘‘दाजी’’ और श्री बी.रतिनासबापथी द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘होली तीर्थंकर्स’’ इन द लाइट ऑफ हार्टफुलनेस ‘पुण्यात्मन् तीर्थंकर और हार्टफुलनेस’ के हिन्दी संस्करण का मंत्री श्री काश्यप ने स्थानीय विमोचन किया। ‘‘दाजी’’ ने विमोचन पश्चात पुस्तक की प्रति जैन समाज के श्रीसंघ प्रमुखों अशोक चौटाला, विनोद मेहता, हिम्मत गेलड़ा, अजय खिमेसरा, प्रकाश मूणत, सुशील छाजेड़, अशोक चौपड़ा एवं ओम अग्रवाल को भेंट की। इससे पूर्व हार्टफुलनेस और ‘‘दाजी’’ पर केन्द्रित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन विकास शैवाल एवं आभार युवा संगीतकार सिद्धार्थ काश्यप ने माना।