चार धाम स्थापना से राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाले आदि गुरु शंकराचार्य, भारतीय संस्कृति और अद्वैत दर्शन का अद्भुत संदेश : श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर देव स्वरूपानंद महाराज (अखंड ज्ञान आश्रम)

रतलाम। म.प्र. जन अभियान परिषद्, जिला रतलाम द्वारा आदिगुरु आदि शंकराचार्य जयंती पखवाड़े अंतर्गत जनपद पंचायत सभागृह, रतलाम में जिला स्तरीय व्याख्यानमाला (संवाद योजना अंतर्गत) का आयोजन किया गया, कार्यक्रम का शुभारंभ आदि गुरु शंकराचार्य के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन तथा सामूहिक वंदेमातरम् के गायन से हुआ, जिसे श्रीमति जया शक्तावत द्वारा कराया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर देव स्वरूपानंद महाराज (अखंड ज्ञान आश्रम), परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज (अडवानिया आश्रम), महर्षि श्री संजय शिवशंकर दवे (वैदिक जागृति ज्ञान-विज्ञान पीठ), गुरुदेव श्री ऋषि जी महाराज, परम पूज्य गुरुदेव श्री प्रकाशानंद गिरी जी महाराज तथा गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री विवेक चौधरी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में व्याख्यानमाला की रूपरेखा एवं स्वागत उद्बोधन परिषद के जिला समन्वयक श्री रत्‍नेश विजयवर्गीय द्वारा प्रस्तुत किया गया। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के शंकरदूत हार्दिक अग्रवाल ने बताया कि युवा शंकर दूत भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात कर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए जन-जन तक एकत्व और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश पहुंचा रहे हैं।
गुरुदेव देव स्वरूपानंद जी महाराज (अखंड ज्ञान आश्रम) ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदि शंकराचार्य ने चार धामों की स्थापना के माध्यम से संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने का अद्वितीय कार्य किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, अद्वैत वेदांत दर्शन एवं अपने साहित्यिक ग्रंथों के माध्यम से समाज को एकता, समरसता और आध्यात्मिक चेतना का अमूल्य संदेश दिया।
परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज ने कहा कि युवाओं को शंकराचार्य के आदर्शों को अपनाते हुए समाज में समरसता, एकता और सेवा भाव को बढ़ावा देना चाहिए तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
महर्षि श्री संजय शिवशंकर दवे ने कहा कि अद्वैत सिद्धांत मानवता, समरसता एवं आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। आदि शंकराचार्य ने अल्पायु में ही संपूर्ण भारत का भ्रमण कर अद्वैत वेदांत के माध्यम से समाज को एकता के सूत्र में बांधा।
गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक श्री विवेक चौधरी ने भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात कर समाज को सशक्त बनाने पर अपने विचार रखे तथा गायत्री मंत्रों का उच्चारण करवाया।
अन्य वक्ताओं द्वारा भी संबोधन किया गया। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण की शपथ समाजसेवी श्री मोहनलाल पाटीदार मुरलीवाला द्वारा दिलाई गई। श्री विशाल वर्मा द्वारा सामूहिक राष्ट्रगान कराया गया तथा उपस्थित जनों को विलुप्त प्रजाति के बीजों का वितरण अतिथियों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का आभार विकासखण्ड समन्वयक श्री शैलेन्द्र सिंह सोलंकी द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में श्री महावीर दास बैरागी, श्री विजयेश राठौड, श्री परमानंद सिसौदिया सहित विकासखण्ड समन्वयक, समाजसेवी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि, नवांकुर संस्था, प्रस्फुटन समिति के पदाधिकारी, सीएमसीएलडीपी के परामर्शदाता एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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