श्री महावीरजी रेलवे स्टेशन बना “अहिंसा का प्रवेश द्वार”, अमृत भारत योजना में लगी 1400 किलो की भव्य महावीर प्रतिमा

श्री महावीरजी/करौली (राजेश जैन दद्दू)। जैन धर्म के प्रमुख अतिशय तीर्थ क्षेत्र श्री महावीरजी का रेलवे स्टेशन अब “अहिंसा का प्रवेश द्वार” के रूप में पहचान बना चुका है। भारत सरकार एवं रेल मंत्रालय द्वारा अमृत भारत स्टेशन स्कीम के तहत नवीनीकृत इस स्टेशन के प्रांगण में वर्तमान शासन नायक भगवान 1008 महावीर स्वामी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि भारत में पहली बार:* रेलवे के इतिहास में पहली बार किसी रेलवे स्टेशन पर जैन तीर्थंकर भगवान की इतनी भव्य एवं सुदर्शनीय प्रतिमा स्थापित की गई है। अब देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को ओर स्टेशन से गुजरने वाले यात्रियों को अहिंसा, शांति एवं “जियो और जीने दो” का संदेश देती प्रतिमा के दर्शन होंगे। दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन नरेंद्र जैन ने कहा कि प्रतिमा की भव्यता: स्टेशन प्रांगण के मुख्य गोल सर्कल में बंसी पहाड़पुर के प्रसिद्ध गुलाबी पत्थरों से बनी कलात्मक छतरी के अंदर 1400 किलो वजनी, साढ़े तीन फीट ऊंचाई वाली मनोहरी पद्मासन मुद्रा में भगवान महावीर स्वामी कमलासन पर विराजमान किए गए हैं। और ये भी बड़ा सो भाग्य मिला कि श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज द्वारा अभिमंत्रित यंत्र भगवान के कमलासन में स्थापित किया गया। नरेंद्र जैन ने कहा कि छतरी एवं स्टेशन भवन की पूरी वास्तुकला जैन स्थापत्य शैली से प्रेरित है। दद्दू ने कहा कि भारत वर्षीय जैन समाज एवं श्रद्धालुओं में हर्ष: व्याप्त है । श्री महावीरजी अतिशय क्षेत्र कमेटी एवं सकल जैन समाज ने इस कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्रालय का आभार व्यक्त किया है। प्रतिदिन हजारों यात्री इस स्टेशन पर उतरते हैं। प्रतिमा स्थापना से श्री महावीरजी आने वाले तीर्थयात्रियों को स्टेशन से ही आध्यात्मिक अनुभूति मिलने लगी है।
अमृत भारत योजना: इस योजना के तहत श्री महावीरजी स्टेशन को आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया गया है। स्टेशन का नया स्वरूप जैन धर्म के सिद्धांतों एवं अहिंसा संस्कृति को दर्शाता है।

एक नजर में श्री महावीरजी स्टेशन

  • योजना: अमृत भारत स्टेशन स्कीम
  • विशेष: भारत का पहला रेलवे स्टेशन जहाँ तीर्थंकर प्रतिमा स्थापित
  • प्रतिमा: 1400 किलो, साढ़े 3 फीट, पद्मासन मुद्रा
  • निर्माण: बंसी पहाड़पुर के पत्थरों से कलात्मक छतरी
  • संदेश: अहिंसा का प्रवेश द्वार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound