शब्द समन्वय का प्रतीक है और शब्द ही टकराव और हिंसा की जननी है – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

तरंगा तीर्थ दिगंबर जैन मंदिर (17 अप्रैल 2021) । विश्व की संपूर्ण समस्याओं का समाधान अनेकांतवाद के माध्यम से हल की जा सकती है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने दिगंबर जैन मंदिर तरंगा तीर्थ में शुभ मति आदि 19 माताजी ब्रह्मचारी ख़ु लक जी के साथ के स्वाध्याय चर्चा के दौरान व्यक्त करते हुए कहा कि वीर के शासन में विवादों को कई स्थान नहीं है।
मुनि ने बताया कि अनेकांत की नीव पर ही अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती है एकांत वाद अपने आप में हिंसा है ।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपेक्षा वाद से सभी अपने अपने स्थान पर सही हो सकते हैं चाहे परस्पर विरोधाभास लगता हो । राष्ट्रसंत ने बताया कि भी शब्द समन्वय का प्रतीक है और शब्द ही टकराव और हिंसा की जननी है वीर शासन शासन में टकराव को कई स्थान नहीं संत ने कहा कि अपनी अपनी उपासना पद्धति का पालन करते हुए परस्पर सम्मान करें तीर्थों की संतो के संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित होकर काम करेंगे तो जैन जिंदा रहेगा माताजी ने दिगंबर मंदिर में विराजे का अनुरोध किया जिससे आपके अनुभव का लाभ मिलेगा आहार पानी के लिए भी अनुरोध किया घनश्याम मुनि गौतम मुनि अरिहंत मुनि अक्षत मुनि कौशल मुनि ने चर्चा में भाग लिय ।

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