
रतलाम। प्रिंस प्लाजा, छत्रीपुल निवासी 85 वर्षीय स्वर्गीय श्रीमती सुषमा खोंड (पत्नी स्व. हरिनाथ खोंड) के परिजनों ने उनके निधन के उपरांत नेत्रदान कर मानवता, संवेदनशीलता एवं सामाजिक जागरूकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके इस प्रेरणादायी निर्णय से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला आने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
इस पुनीत कार्य की प्रेरणा प्रेरक ध्रुव कुमार पारखी, श्रीमती रश्मि माधवी पारखी एवं परिवार द्वारा दी गई, जिनके सतत सामाजिक सरोकारों और नेत्रदान जागरूकता के प्रयासों से परिवार ने यह महान निर्णय लिया।
निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्रीमती सुषमा खोंड के स्वर्गवास की सूचना परिजनों द्वारा काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी को दी गई। सूचना प्राप्त होते ही उन्होंने तत्काल गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी.एल. ददरवाल एवं नेत्रम संस्था को सूचित किया। परिजनों की सहमति प्राप्त होने पर नेत्रदान की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
उल्लेखनीय है कि काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के वरिष्ठ डॉ. दीनदयाल काकानी एवं उनके सुपुत्र आयुष काकानी द्वारा श्रीमती सुषमा खोंड की चिकित्सा की जा रही थी। इस प्रेरणादायी निर्णय में उनके पुत्र दिलीप , पुत्रवधु अलका मेंढे, शोभा खोंड (मेंढे), पुत्रियां अनिता देव एवं छाया अवस्थी सहित समस्त परिवार ने सहमति प्रदान कर समाज के समक्ष सेवा और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी.एल. ददरवाल ने मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न कराई। इस अवसर पर काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी, नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, सुशील मीनु माथुर सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
अंत में काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन, नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास, बड़नगर द्वारा परिजनों को प्रशस्ति-पत्र भेंट कर उनकी उदारता, संवेदनशीलता एवं मानवता के प्रति समर्पण का सम्मान किया गया।