डॉ कैलासनाथ काटजू विधि महाविद्यालय रतलाम मे पर्यावरण संरक्षण विशेष व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया

रतलाम । डॉ कैलासनाथ काटजू विधि महाविद्यालय रतलाम मे दिनांक 06-07-2026 को प्रातः 10 बजे पर्यावरण संरक्षण विशेष व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया। विशेष व्‍याख्‍यान के मुख्‍य वक्‍ता आदरणीय श्रीमान कैलाश जी व्‍यास, पूर्व -उपसंचालक अभियोजन एवं सदस्‍य, रतलाम एज्‍यूकेशनल सोसायटी, रतलाम ने अपने उदबोधन मे कहा की स्‍वतंत्रता संग्राम एवं स्‍वतंत्र भारत की भुमिका मे जिनके नाम से यह महाविध्‍यालय प्रचलित है डॉ. कैलासनाथ काटजू, विधि विशेषज्ञ एवं डी.लिड प्राप्‍त की विशेष भुमिका रही है। भारत के पांच वकीलों मे से एक डॉ. कैलासनाथ काटजू थे जो निशुल्‍क मुकदमा लडने के लिए प्रसिद्ध थे। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ मे उन्‍होने ने कहा की एक व्‍यक्ति को एक दिन मे दो ऑक्‍सीजन सिलेन्‍डर जितनी ऑक्‍सीजन की आवश्‍यकता होती है, एक सिलेन्‍डर की कीमत वर्तमान मे 700 रूपये औसतन है, एक व्‍यक्ति अपने सम्‍पूर्ण जीवनकाल मे लगभग 20 करोड रूपये तक की ऑक्‍सीजन एक पेड से प्राप्‍त करता है। लेकिन शहरीकरण के विकास की अति महत्‍वाकांक्षा मे हम पेडो को लगातार नष्‍ट कर रहे है। जिसके परीणाम स्‍वरूप हम सब ने उतराखण्‍ड त्रासदी को देखा है।
रतलाम का नाम पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाता है जिसके अन्‍तर्गत उच्‍चत्‍तम न्‍यायालय के निर्णय मुंसीपल कार्पोरेशन बनाम वरदीचन्‍द 1980 सर्वोच्‍च न्‍यायालय का निर्णय प़ष्‍ठ क्रमांक 162 सम्‍पूर्ण भारत ही नही बल्कि सम्‍पूर्ण विश्‍व को दिशा निर्देश प्रदान करता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भारतीय ईतिहास मे सन 1730 मे अम़ता देवी एवं उनकी तीन लडकियों का बलिदान आन्‍दोलन उल्‍लेखनिय है जिन्‍होन पेड बचाने के लिए अपने सर कटवा लिए, इसी के संदर्भ मे चिपको आन्‍दोलन के अन्‍तर्गत 84 गॉवों के 363 लोगो ने खेजडी पेड बचाने के लिए नरसंहार का सामना किया। इसी संदर्भ मे बाबा आम्‍टे जो कि महाराष्‍ट्र के निवासी का उदाहरण हमारे समक्ष प्रस्‍तुत है । कुछ लोगो ने बाबा आम्‍टे को कहा की एक अखरोट का पेड लगाने पर 50 वर्ष बाद इसमे फल आते है, यह पेड आप क्‍यो लगा रहे जिसके फल आपके जीवनकाल मे प्राप्‍त ही नही हो सकते, तो बाबा आम्‍टे ने प्रति उत्‍तर मे कहा की यदि हमारे पूर्वजो ने भी यही सोचा होता तो आज हम फल नही खा सकते थे।
आदरणीय व्यास जी ने सभी से अनुरोध है कि अपने जीवनकाल मे न्‍युनतम 05 पेड अवश्‍य लगाये, केवल लगाये ही नही बल्कि उनका पालन पोषण भी करे। भले ही उस पेड के फल आपके जीवनकाल मे आए या ना आए हमारी आने वाली पिढी को सुरक्षित करना हो तो हमे पर्यावरण संरक्षण करना सुनिश्चित करना होगा। हम सभी अपने आपको जिम्‍मेदार नागरिक समझकर अपनी सामाजिक जिम्‍मेदारी का निर्वहन करेंगे तो स्‍वस्‍थ्‍य वायु मे हम एवं हमारी आनी वाले पिढी श्‍वास ले सकेंगे। कार्यक्रम मे डॉ. जितेन्‍द्र शर्मा, (सहा. प्रा.), श्री हरेन्‍द्र प्रताप सिंह (सहा. प्रा.), श्रीमती कोमल सिंह (व्‍याख्‍याता), श्रीमती रंजू शर्मा (व्‍याख्‍याता) एवं गैर शैक्षणिक स्‍टॉफ श्री अरविन्‍द्र गेडाम (लेखापाल), श्री भुपेन्‍द्र रामटेकेकर (ग्रंथपाल), श्री प्रदीप पाठक (मु. लिपिक), श्रीमती रितुबाला व्‍यास (लिपिक), श्रीमती सपना जैन (सहा. ग्रंथपाल), सभी सहायक कर्मचारी एवं बडी संख्‍या मे नव प्रवेशित विध्‍यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का स्‍वागत भाषण प्राचार्य डॉ. अनुराधा तिवारी द्वारा दिया गया एवं कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती अर्चना धाकड (व्‍याख्‍याता) द्वारा किया गया।

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