धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान के लिए अ.भा.जैन दिवाकर विचार मंच ने उठाए ठोस कदम

मैसूरु। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अधिवेशन में राष्ट्रसंत श्रवण संघीय मंत्री डॉ कमल मुनि जी कमलेश के सानिध्य तथा मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रकाश मेहता, राष्ट्रीय युवा पूर्व अध्यक्ष आशीष चौरड़िया एवं महिला शाखा प्रचार मंत्री ललिता जोगड़ के तत्वावधान में धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान, समाज के उत्थान एवं विकास तथा जनसमस्याओं से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
उक्त जानकारी देते हुए राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने बताया कि अधिवेशन में निर्णय लिया गया कि जैन दिवाकर संप्रदाय के किसी भी साधु-साध्वी को आपातकालीन आवश्यकता होने पर मंच सदैव तत्पर रहेगा। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सेवा एवं सहायता उपलब्ध कराने हेतु जिम्मेदार कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों के संपर्क सूत्र भी निर्धारित किए गए हैं।

आपातकालीन एवं विभिन्न सेवाओं के लिए संपर्क सूत्र इस प्रकार हैं—

  • राष्ट्रीय मार्गदर्शक एवं समन्वय: अभय सुराणा — 9340008131
  • मीडिया संबंधी कार्य: दिनेश संचेती — 9358433033
  • चिकित्सा सेवा: प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. जी.एस. पीपाड़ा, कोलकाता — 9830030774
  • 8 वर्ष से अधिक तपस्या करने वाले तपस्वियों के पारणा हेतु पुड़िया व्यवस्था: पूनम बोहरा, चेन्नई — 9840956789
  • शासन-प्रशासन संबंधी सहयोग: आईपीएस सुचिता — 7721885200
  • कानूनी सलाह: सुरेश गोलेछा — 9282103450
  • धार्मिक शिविर एवं पर्युषण पर्व में स्वाध्याय: डॉ. आभा गांधी — 9799838779
  • बच्चों की शिक्षा हेतु निःशुल्क (पहली से एवं 12वीं तक पढ़ाई हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम)
  • अभय श्रीमाल — 99933054297
  • साधु-साध्वियों के धार्मिक उपकरण एवं आवश्यक सामग्री: जतन गोटा — 9425328236
  • वीरांगना सम्मान समारोह: आशा सामर — 9406659600
  • राजनीतिक क्षेत्र में सहयोग: राजेश सेठिया — 9414149092
  • भाइयों की शिक्षा एवं चिकित्सा सहायता: नरेश जैन — 9540002778
  • अल्पसंख्यक वर्ग को मिलने वाले सरकारी लाभों संबंधी मार्गदर्शन: रेनू जैन — 9449695708
  • गौ-संवर्धन संबंधी कार्य: कृष्ण कुमार मित्तल — 9980246400

मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणाने कहा कि राष्ट्र संत डॉ कमल मुनि कमलेश के दिशा निर्देश में सारे कार्य संपन्न होंगे। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य साधु-साध्वी, तपस्वी, विद्यार्थी एवं समाज के अन्य जरूरतमंद वर्गों तक समय पर सहायता पहुंचाना है। राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को समाजहित में प्रभावी रूप से लागू करने तथा सेवा कार्यों का विस्तार करने पर भी विशेष जोर दिया गया।