पहले तो सुना था देव गुरु धर्म की कृपा के बारे में अब तो साक्षात अनुभव भी कर लिया हमने

अप्रत्याशित स्वास्थ्य लाभ का प्रेरणादायी प्रसंग जो कोई साक्षात चमत्कार… से कम नहीं है

निम्बाहेड़ा (राज.) । वीर प्रभु भगवान महावीर स्वामी एवं जैन दिवाकर पूज्य गुरुदेव श्री चौथमल जी महाराज के दिव्य आशीर्वाद और असीम अनुकंपा से उपाध्याय प्रवर डॉ.श्री गौतम मुनि जी महाराज के मंगलमय मार्गदर्शन तथा आशीर्वाद एवं तप चक्रेश्वरी उपप्रवर्तनी महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज के उग्र आयम्बिल तप संयम साधना के प्रभाव से मिले आशीर्वाद से स्वास्थ्य लाभ का यह प्रसंग श्रद्धा,आस्था और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
वीर प्रभु महावीर स्वामी एवं जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज के प्रति आस्थावान एवं समर्पित अखिल भारतीय श्री जैन दिवाकर संगठन समिति(रजि.) के वरिष्ठ संरक्षक जैन दिवाकर रत्न से सम्मानित हमारे पुज्य पिताजी श्रीमान केसरीमल जी सा. संघवी (निम्बाहेड़ा) आयु 90 वर्ष जोकि दस दिनों से उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल के गहन चिकित्सा कक्ष में ऑक्सीजन सपोर्ट पर निरंतर उपचार के बावजूद भी उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित कोई सुधार नहीं हो रहा था। चिकित्सा कर रही डॉक्टरों की टीम ने आगे के उपचार हेतु ब्रोंकोस्कोपी करने की सलाह दी जिसमे उनका मानना था कि इस दौरान ऑक्सीजन स्तर असंतुलित होने पर मरीज को वेंटिलेटर पर भी लेना पड़ सकता है। यह परिस्थिति पूरे परिवार के लिए अत्यंत दुविधापूर्ण थी जो कि हमारे लिए एक तरफ खाई, तो दूसरी तरफ कुआँ था। अब आखिर करे तो क्या करे, ऐसी विषम पस्थिति में आदरणीय बाऊजी ने पूर्ण धैर्य एवं देव-गुरु-धर्म के प्रति अटूट आस्था समर्पण का परिचय देते हुए परिवारजनों से स्पष्ट शब्दों में कहा— “अब घर ले चलो मुझे आगे कोई चिकित्सकीय उपचार नहीं करवाना है।”
इधर तप चक्रेश्वरी महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज द्वारा श्रावकों के माध्यम से निरंतर बाऊजी के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा रही थी। इसी दौरान श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ,निम्बाहेड़ा के अध्यक्ष भाई श्री पारस जी जैन बोहरा (मौसम बहार) का वीडियो कॉल आया,उन्होंने बताया कि वे अभी जैन दिवाकर भवन में महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज के पास में हैं और उन्होंने आग्रह किया कि बाऊजी को वीडियो कॉल पर महा साध्वी जी के दर्शन एवं मांगलिक श्रवण करवाया जाए।
पूज्या महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी म.सा द्वारा फरमाई गई महा मांगलिक को बाऊजी ने अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और विश्वास के साथ श्रवण किया तथा महासाध्वी श्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
उस समय सचमुच ऐसा प्रतीत हुआ मानो विपत्ति की इस घड़ी में गुरुकृपा आशा का प्रकाश बनकर सामने आया हो।
अगले ही दिन पुनः प्रातःकाल भाई श्री पारस जी बोहरा एवं युवा अध्यक्ष अर्पित जी संघवी का फोन आया। उन्होंने महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज द्वारा कहा गया संदेश दिया की—
” आप आज की तारीख मे बाऊजी को अस्पताल से छुट्टी करवाकर निम्बाहेड़ा ले आइए। साथ ही उन्होंने यह भी कहां कि बाऊजी ने अपने जीवन मे सैकड़ों साधु-संतों की सेवा की है और वह हमारे संघ समाज के प्रमुख स्तंभ के रूप मे सदैव समर्पित रहे है,साथ ही उनका वीरवाल प्रवृत्ति प्रारंभ करवाने में भी अमूल्य योगदान रहा है । जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता तथा उनका जैन दिवाकर जी महाराज के प्रति समर्पण अद्वितीय रहा है। और उनका आयुष्य बलवान है, सब कुछ अच्छा ही होगा।”
महासाध्वी जी का यह संदेश सुनकर बाऊजी ने दृढ़ आत्मविश्वास के साथ हमे कहा—
” आप सभी देव-गुरु और धर्म के प्रति पूर्ण रूप से विश्वास रखो। पहले मुझे नाथद्वारा में उपाध्याय प्रवर डॉ.श्री गौतम मुनि जी महाराज के दर्शन,उनका मांगलिक तथा मुझे आवश्यक प्रत्याख्यान लेना है,फिर निम्बाहेड़ा में बिराजमान महासाध्वी श्री अरुणप्रभा जी महाराज के दर्शन मांगलिक एवं उनका आशीर्वाद दिलाकर घर पर ले चलो।”
बाऊजी के दृढ़आत्म बल और धर्म के प्रति आस्था तथा उनके विश्वास के आगे हम सभी परिवार जन नतमस्तक हो गये तथा डॉक्टर के लाख मना करने के बावजूद बाऊजी को अस्पताल से छुट्टी दिलवाई तथा उन्हे ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ नाथद्वारा लेकर गये,जहाँ उपाध्याय प्रवर डॉ. श्री गौतम मुनि जी महाराज ने कुछ आवश्यक आगारों की छूट के साथ बाऊजी को सभी बड़े प्रत्याख्यान करवाए, तथा उपाध्याय प्रवर ने धर्मोपदेश,महा मांगलिक के साथ भरपुर आशीर्वाद दिया तथा कहा—
“महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज निम्बाहेड़ा में ही विराजमान हैं। आप उनके मार्गदर्शन में धर्मध्यान तथा समय-समय पर उनके मंगल पाठ का लाभ दिलवाते रहना।”
हमारे विनम्र आग्रह पर दिनांक 12 अगस्त 2026 को निम्बाहेड़ा संघ के पदाधिकारीयो एवं सदस्यों सहीत तप चक्रेश्वरी महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज हमारे निवास पर पधारे। उन्होंने बाऊजी को धर्मोपदेश प्रदान किया एवं आध्यात्मिक प्रेरणा दी तथा महा-मांगलिक फरमाकर उनको मंगलमय आशीर्वाद प्रदान किया।
इसके उपरांत जो अप्रत्याशित स्वास्थ्य सुधार हुआ,उसने पूरे परिवार को आश्चर्य एवं श्रद्धा से भावविभोर कर दिया। जोकी हमारे लिए किसी दिव्य चमत्कार से कम नहीं है। क्योंकि महा साध्वी जी के मंगल पाठ के बाद से ही आदरणीय बाऊजी के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार दिखाई देने लगा है।
उपरोक्त सेवा कार्य में स्थानीय संघ के पदाधिकारीयो का भी सराहनीय योगदान रहा जिसके लिए उन सभी महानुभावों के प्रति हृदय पूर्वक आभार व्यक्त करते हैं ।
अभय कुमार,अनिल कुमार, सिद्धराज संघवी परिवार ने इस अप्रत्याशित एवं उत्साहवर्धक स्वास्थ्य सुधार को देव-गुरु-धर्म के प्रति अटूट आस्था श्रद्धा तथा परम पूज्य जैन दिवाकर श्री चौथमल जी महाराज का दिव्य आशीर्वाद तथा उपाध्याय प्रवर डॉ.श्री गौतम मुनि जी महाराज का प्रेरक उद्बोधन आशीर्वाद एवं विशेष रूप से तप चक्रेश्वरी महासाध्वी श्री अरुण प्रभा जी महाराज के उग्रआयंबिल तप,दृढ़ संयम,साधना,आध्यात्मिक शक्ति तथा उनके द्वारा प्रदत् मंगलमय मांगलिक तथा आशीर्वाद का प्रत्यक्ष प्रसाद माना है।

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