ध्यान – स्वयं को जानने की यात्रा

रतलाम । प्रेस एस वाय एस साइक्लोथान द्वारा युवाओं में स्वस्थ रहने तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से शहीद चौक से धामनोद साइन मंदिर तक साइकिल राइड व ज्ञान का आयोजन किया गया आयोजक डॉक्टर डॉ राहुल पंजाबी ने बताया कि इस दौरान नागरिकों ने 14 किलोमीटर तक साइकिल चलाई साइन मंदिर धामनोद पर ध्यान किया इस दौरान नागरिकों को संबोधित करते हुए योग विशेषज्ञ शुभम झाला ने कहा कि ध्यान केवल आँखें बंद करके बैठने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि स्वयं को जानने और अपने अस्तित्व की गहराई में उतरने की एक यात्रा है। जब मनुष्य स्वयं को देखना प्रारंभ करता है, तब धीरे-धीरे उसे अपने विचारों, भावनाओं, भय, असुरक्षाओं और जीवन में उत्पन्न होने वाले दुःखों के वास्तविक स्वरूप का बोध होने लगता है।
ध्यान के माध्यम से हम अपने जीवन को अधिक सजग, संतुलित और सार्थक बना सकते हैं। जीवन में दुःख, कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ आती रहेंगी, लेकिन ध्यान हमें उनसे भागना नहीं, बल्कि उनके सामने जागरूक होकर खड़े होना सिखाता है। हमारा उद्देश्य लोगों को ऐसी आंतरिक जागरूकता की ओर ले जाना है, जहाँ व्यक्ति दुःख के सामने हार न माने, अत्यधिक चिंतन में स्वयं को न खोए और निराशा के अंधकार में अपनी चेतना का प्रकाश न भूले।
जब मनुष्य स्वयं को देखने लगता है, तब उसे धीरे-धीरे यह समझ आने लगती है कि वह केवल अपनी परिस्थितियाँ, अपने विचार या अपनी समस्याएँ नहीं है। उसके भीतर एक ऐसी विराट चेतना भी विद्यमान है, जिसे जानना उसके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्राओं में से एक हो सकता है।
हमारा प्रयास है कि व्यक्ति अपने दुःख और परेशानियों से केवल बाहर निकलने का प्रयास न करे, बल्कि उस आंतरिक अवस्था को पहचाने जहाँ शांति किसी बाहरी परिस्थिति पर निर्भर नहीं होती। जहाँ मन धीरे-धीरे स्थिर होता है, भीतर स्वीकार जन्म लेता है और जीवन में आनंद की एक नई अनुभूति प्रकट होती है।
आज का युवा केवल शरीर से स्वस्थ और सक्रिय हो, इतना ही पर्याप्त नहीं है। शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और आंतरिक जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। हमारा प्रयास है कि युवा अपने शरीर को सशक्त बनाने के साथ-साथ ध्यान के माध्यम से अपने मन और चेतना को भी समझ सके। हमारा उद्देश्य केवल ध्यान करवाना नहीं, बल्कि ध्यान में उतरने की कला को लोगों तक पहुँचाना है—ताकि प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर झाँक सके, स्वयं को जान सके और अपने जीवन को अधिक जागरूकता, शांति और आनंद के साथ जी सके।
हमारा संकल्प है कि ध्यान केवल कुछ लोगों तक सीमित न रहे। ध्यान हर व्यक्ति तक पहुँचे और प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं को जानने का अवसर मिले। क्योंकि स्वयं को जानने की यात्रा ही उस जीवन की शुरुआत है, जिसमें मनुष्य बाहर की दुनिया को बदलने से पहले अपने भीतर के संसार को समझना प्रारंभ करता है। इस दौरान जुंबा भी किया। चिंटू पावैचा, विजय टांक, मदन सोनी, अंकित लिंबोडिया, अभिषेक रावल, अमित, सिद्धार्थ, पिंकी, वेदिका सहित नागरिक मौजूद थे।

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