परमात्मा की भक्ति किसी भी भाव से करो, उसका परिणाम जरूर मिलता है-  श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा

रतलाम,24 अगस्त। खेत में बीज बोते है, तो कोई उल्टा, कोई सीधा और कोई टेढा गिरता है। लेकिन सिंचन होने पर सभी बीज उगते अवश्य है। परमात्मा की भक्ति भी ऐसी है, जो किसी भी भाव से करो, उसका परिणाम जरूर मिलता है। चाहे अपेक्षा से करो, लाभ के लिए करो अथवा अन्य फल के लिए करो, निश्चित समय पर चाहे या नहीं चाहे, देर-सवेर उसका फल तो मिलता ही है।
यह उदगार मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने व्यक्त किए।  मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि भक्ति मन, वचन और काया से सभी से होती है। कीर्तन मन से करो, वंदन काया से करो और महिमा वचन से करो। भक्त के मन में भक्ति से पहले कृतज्ञता के भाव होना चाहिए, क्यांेकि इसके बिना भक्ति फलदायी नहीं होती। भक्त यदि भक्ति के पहले सम्यकत्व की शुद्धि कर लेता है, तो मोक्ष का द्वार पा लेता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि जिनशासन में हर आत्मा को परमात्मा के रूप में देखा गया है। लेकिन आत्मा जब तक महात्मा नहीं होती, तब तक परमात्मा नहीं बनती। अशुद्ध आत्मा जीवात्मा तथा शुद्ध आत्मा परमात्मा का स्वरूप है। इनके बीच फर्क सिर्फ कर्मों का होता है। हमारी आत्मा भी परमात्मा बन सकती है, बशर्ते तीर्थंकर भगवन को आदर्श मानकर कर्म किए जाए। भगवान की स्तुति फल और लाभ देने वाली होती है। लाभ चाहने वाला लोभी होता है और लोभी कभी तिरता नहीं है। इसके विपरीत फल चाहे, तो वह असीमित मिलता है। फल तो फलता चला जाता है, उसकी कोई सीमा नहीं होती। यदि लाभ की इच्छा के बिना भक्ति की जाती है, तो उसका फल मोक्ष के रूप में मिलता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि परमात्मा की स्तुति में असीमित ताकत होती हैं। इसलिए जब भी स्तुति करे, तो मन के भाव शुद्ध रखे और कृतज्ञता प्रकट करे। यदि तादात्म भाव से स्तुति की जाएगी, तो वह भक्ति में बदलेगी और मनुष्य भव से तार देगी। प्रवचन को आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने गुरू महिमा का गुणगान किया। इस दौरान उनके साथ ठाणा-8,  महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा, एवं श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। प्रवचन में श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग ने किया।

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