रतलाम,28 अगस्त। जैन दर्शन हमें सिखाता है कि सच्ची रक्षा किसी बाहरी बंधन से नहीं, बल्कि अहिंसा, सत्य, संयम और आत्मशुद्धि से होती है। आज हम संकल्प लें कि अपने विचारों, वाणी और व्यवहार से किसी भी जीव को दुःख नहीं पहुँचाएँगे। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और रक्षा का पर्व नहीं, बल्कि आत्मीयता, संयम, करुणा और परस्पर मंगलभाव को दृढ़ करने का पवित्र अवसर है।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि राखी का धागा जिस प्रकार प्रेम और विश्वास को जोड़ता है, उसी प्रकार मैत्री का धागा समस्त जीवों को जोड़ता है। रक्षाबंधन पर सबकों अपने जीवन में क्षमा, करुणा और सद्भाव को स्थान देने तथा प्राणी मात्र के प्रति मंगल भावना रखने का संकल्प लेना चाहिए।
प्रवर्तकश्री ने जीवन में आरोग्य का महत्व बताते हुए कहा कि सारा दुख कर्म से है और आरोग्य की अवस्था कर्महीन अवस्था होती है। आरोग्य आत्मा का गुण है। भगवान ने जैसा आरोग्य प्राप्त किया और बोधि के साथ मन की शांति प्राप्त की, वैसा ही सबकों प्राप्त करना है, तो भगवान के बताए मार्ग पर चलना चाहिए। आयुर्वेद बीमारी को जड से खत्म करने की चिकित्सा पद्धति है,इसमें कम से कम तीन महीने और ज्यादा से ज्यादा 6 महीनों में रोग जड से मिट जाता है। इसके विपरीत अंग्रेजी दवाएं रोग तो मिटाती है, लेकिन अन्य रोग खडे कर देती है। इससे एक बार रोग खत्म होने के बाद फिर वही रोग फिर से खडा हो जाता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि ज्ञानियों के पास समाधि रहती है। वे समाधि में लीन रहते है और कभी विचलित नहीं होते। साधना करते वक्त मनुष्य को भी विचलित नहीं होना चाहिए और अपने कर्म रोग का इलाज करना चाहिए। कर्म क्षय की दवा मिल जाती है, तो आत्मा के परमात्मा बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। प्रबल आत्म शक्ति जिसके पास होती है, वही कर्म शक्ति को नष्ट कर सकता है। इससे सारी बिमारियांे मिट जाती है।
प्रवचन के आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। उनके साथ ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा, एवं श्री दर्शनमुनिजी मसा मंचासीन रहे। प्रवचन के दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन आयुष गंग द्वारा किया गया।