
इंदौर(राजेश जैन दद्दू)। जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं अनुसंधान के क्षेत्र मे पारस्परिक सहयोग से हाल ही में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इन्दौर एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर के मध्य जैन दर्शन एवं विद्या,प्राकृत भाषा एवं साहित्य, भारतीय ज्ञान परम्परा, शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, प्रकाशन तथा समाजोपयोगी गतिविधियों के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग स्थापित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (MOU) निष्पादित किया गया।
एम ओ यू पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई एवं कुलसचिव प्रोफेसर प्रज्वल खरे एवं पीठ की ओर से पीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल एवं सचिव डॉ अरविंद जैन ने हस्ताक्षर किए। देवीअहिल्या विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत एक प्रतिष्ठित राज्य विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय का जैन स्टडीज सेंटर जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं संबंधित विषयों में शिक्षण, अनुसंधान तथा विस्तार गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रहा है। वहीं, कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा, पाण्डुलिपि संरक्षण, प्रकाशन, शोध एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत प्रतिष्ठित संस्था है।
इस MOU का प्रमुख उद्देश्य दोनों संस्थाओं के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधानात्मक सहयोग को सुदृढ़ करना तथा जैन दर्शन, प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित ज्ञान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करना है।
समझौते के अंतर्गत जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं संबंधित विषयों में शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, डिग्री,शोध, अल्पकालीन, कौशल विकास एवं मूल्यवर्धित कार्यक्रमों के संचालन में दोनों संस्थाएँ सहयोग करेंगी।
दोनों संस्थाओं द्वारा संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचार, प्रकाशन एवं ज्ञान-सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यानमाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों के शैक्षणिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
MOU के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परम्परा, जैन साहित्य एवं पाण्डुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं प्रसार के क्षेत्र में भी विशेष सहयोग किया जाएगा। दोनों संस्थाएँ पारस्परिक सहमति से शैक्षणिक कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करेंगी तथा संयुक्त शोध परियोजनाओं, पुस्तकों की सामग्री एवं अन्य प्रकाशनों के विकास में सहयोग करेंगी।
इसके साथ ही दोनों संस्थाएँ अपने उपलब्ध पुस्तकालय, पाण्डुलिपि संग्रह, अभिलेखागार, संग्रहालय, डिजिटल संसाधनों एवं अन्य अधोसंरचना का शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए पारस्परिक रूप से उपयोग कर सकेंगी। विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान, इंटर्नशिप एवं अध्ययन भ्रमण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, उद्योगों, CSR एवं शासकीय एजेंसियों के सहयोग से विभिन्न शोध एवं विकास परियोजनाएँ संचालित करने तथा पारस्परिक सहमति से अन्य शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियाँ संचालित करने का भी प्रावधान किया गया है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर जैन स्टडीज सेंटर के निदेशक प्रो. रजनीश जैन सह-निदेशक प्रो. राहुल सिंघई तथा कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल,ट्रस्टी आदित्य कासलीवाल सचिव डॉ. अरविन्द कुमार जैन एवं ‘सिरि भूवलय’ शोध परियोजना के निदेशक इंजी. अनिल कुमार जैन सहित संबंधित पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।