कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक मंच पर जुटेगा समंग्र जैन समाज, मुनि श्री सुधा सागर जी ने दिया संगठित शक्ति का महामंत्र

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । इंदौर के दलालबाग विद्या सुधा देशना मंडप में राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का वार्षिक सम्मेलन एवं स्थापना दिवस तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज संसघ के पावन सानिध्य में ऐतिहासिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ। राष्ट्रीय जिन शासन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि सम्मेलन में मध्य प्रदेश के अनेक जिलों सहित राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत से आए हजारों समाजजनों की उपस्थिति में जैन समाज की सुरक्षा, धर्म संस्कृति और स्वाभिमान के लिए राष्ट्रव्यापी संकल्प लिए गए। मुनि श्री सुधा सागर महाराज का पावन संदेश ओजस्वी प्रवचन में संपूर्ण जैन समाज को दिशा निर्देश देते हुए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
मुनिश्री ने प्रेरणा दी कि समाज में किसी भी प्रकार का पंथ, संत वर्ग या जाति का भेद नहीं होना चाहिए। जो भी देव, शास्त्र और गुरु का सच्चा भक्त है, वह सब एक हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। धर्म की सुरक्षा के लिए संपूर्ण समाज को एक ध्वज तले संगठित होना अनिवार्य है।
संतों का जीवन और धर्म का मूल विचार सदैव धर्म संस्कृति एवं जन-जन के कल्याण के लिए होता है। जिस प्रकार नदियाँ दूसरों के लिए बहती हैं, वृक्ष दूसरों को फल देते हैं और गाय परोपकार के लिए दूध देती है, उसी प्रकार हर व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय समाज, धर्म संस्कृति की सुरक्षा और पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित करना चाहिए।
धर्म एवं तीर्थों की सुरक्षा के लिए केवल मौखिक बातें काफी नहीं हैं; प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर पारदर्शी दस्तावेजीकरण आवश्यक है। युवाओं और महिलाओं को संस्कारों से जोड़ने के लिए नियमित रूप से शाखाओं, ध्वज वंदन और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया गया।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रव्यापी संगठन का विस्तार
सम्मेलन का सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु ” संपूर्ण जैन समाज को एक सूत्र में पिरोने का राष्ट्रीय संकल्प रहा:एक भारत – एक जिनशासन: राष्ट्रीय जिन शासन संघ का मुख्य उद्देश्य केवल प्रांतीय या स्थानीय स्तर तक सीमित न रहकर पूरे देश में हर जैन धर्मावलंबी को संगठित कर जिनशासन से जोड़ना है।
संघ प्रमुख राकेश गोहिल ने कहा कि कन्याकुमारी से लेकर सूरत, मुंबई (मीरा रोड), राजस्थान के विभिन्न नगरों तथा मध्य प्रदेश के सभी जिलों में संघ की शाखाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं, जिससे देश के किसी भी कोने में रह रहे जैन धर्मावलंबी को सामाजिक व धार्मिक सुरक्षा और सहयोग मिल सके।
समारोह के मुख्य सांगठनिक निर्णय देशभर में जैन समाज का सही और अद्यत डेटाबेस तैयार करने के लिए डिजिटल पोर्टल के माध्यम से परिवारवार जनगणना अभियान चलाया जाएगा, जिससे अल्पसंख्यक अधिकारों और प्रशासनिक स्तर पर समाज की प्रभावी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सके।
प्राचीन धरोहर व वर्तमान जैन मंदिरों, तीर्थ क्षेत्रों, धर्मशालाओं और देवद्रव्य संपत्तियों का पारदर्शी कानूनी दस्तावेजीकरण तैयार किया जाएगा। एकीकृत केंद्रीय रजिस्ट्री मॉडल बनाकर अवैध कब्जों और भूमि विवादों से धरोहरों को सुरक्षित रखा जाएगा।
मुख्य वक्ताओं में पूर्व जस्टिस अभय गोहिल, पूर्व डीजे कुलदीप जी, हुकुमचंद जी सावला, डां अंशु गोदरे सरला सामरिया आदि रहे। स्वागत भाषण आनंद गोधा ने दिया।
केंद्रीय संघनायक राकेश गोहिल, मयंक जैन, महिला संघ से ब्र सरिता दीदी, महिला परिषद् की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन सोनाली बागड़ियां वीरेंद्र अजमेरा, विशाल जैन रीवा , प्रमोद जी सागर, अनिल जी अँचल ललितपुर, मांगीलाल जी रतलाम, पंकज जी प्रधान, भोपाल संजय जी मुंगावली, राजेश जी मुंगावली, देवेंद्र जी शाजापुर, एसके जी जैन गुना , एसके जी जैन दिल्ली, अनिल जी उज्जैन, गौरव जैन उज्जैन विपिन जी अशोक नगर आदि अनेक जिलों से पदाधिकारी सम्मिलित हुए। मंच संचालन भोपाल संघनायक जयदीप ने किया। आभार प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने माना।