इंदु सिन्हा की पुस्तकों डिजिटल युग का डोकरा और उन दिनों प्रेम का विमोचन

रतलाम। कहानीकार इंदु सिन्हा की कहानियों में समाज की विद्रूपदाओं पर प्रहार ओर उच्च संस्कार की अभिव्यक्ति निहित है । इन कहानियों में मानवीय अवमूल्यन, बढ़ते सामाजिक अपराध युवा पीढ़ी के गिरते संस्कार पर प्रहार कर आदर्श समाज की संरचना का संदेश दिया है ।
उक्त विचार राष्ट्रीय कवि, साहित्यकार डा. रमेश चांगेसिया ‘प्रभात’ ने सुरसंगम साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित इंदु सिन्हा इंदु के कहानी संग्रह ” डिजिटल युग का डोकरा’ एवं ‘उन दिनों प्रेम” के विमोचन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि साहित्यकार सदैव साहित्य से लोकमंगल के पुनीत कार्य करता है।
अध्यक्षता करते हुए कवि , अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि कहानीकार इंदु सिन्हा ने अपनी कहानियों के माध्यम टूटते रिश्तों, प्रेम में घटित घटनाओं से समाज के समक्ष प्रश्न खड़ा किया है। इन कहानियों में प्रतिरोध नज़र आता है जो कथाकार की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विशेष अतिथि युवा कथाकार आशीष दशोत्तर ने कहा कहानियां समाज की दिशा ओर दशा तय करती हैं । साहित्य ब्यूटीपार्लर की तरह नहीं होता। उसके सामने आम आदमी के दर्द होते हैं। इसीलिए उसकी रचनाएं समाज में आदर्श प्रस्तुत करती हैं । शिक्षाविद श्रीमती वीणा छाजेड़ ने भी संग्रह पर विचार रखे।
प्रारंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन पूजन कर कार्यकम का शुभारंभ किया । स्वागत भाषण वैदेही कोठारी ने दिया । अतिथियों का स्वागत आर एस गोयल, सपना हेमनानी, नरेंद्र सिंह पँवार, संजय परसाई ‘सरल’, रणजीत सिंह राठौर , यशपाल सिंह तंवर, विनोद झालानी, श्यामसुंदर भाटी, खुशबू जांगलवा ने किया |
कहानी पर हुई चर्चा
कहानीकार श्रीमती इंदु सिन्हा इंदु ने ‘डिजिटल युग का डोकरा’ कहानी का पाठ किया। पुस्तक पर कवि जुझारसिह भाटी, रमेश मनोहरा, योगिता राजपुरोहित, प्रकाश हेमावत, शशि गोयल ने विचार रखे ।
संचालन श्रीमती सरिता दशोत्तर ने किया । आभार श्रीमती नीलिमा छबि अध्यक्ष लायंस समर्पण ने माना । अतिथियों को लायंस क्लब समर्पण द्वारा प्रतीक चिन्ह भेंट किए गए। इस अवसर पर विभिन्न साहित्यिक संस्था प्रमुख ने कहानीकार श्रीमती इंदु सिन्हा का पुष्पहार शाल, श्रीफल से सम्मान किया । कार्यक्रम में नगर के गणमान्यजन साहित्यनुरागी उपस्थित थे।