ऋषभोदय, दिल्ली में आचार्य श्री की धर्मसभा, सैकड़ों भक्तों ने लिया लाभ

नई दिल्ली/ऋषभोदय तीर्थ (राजेश जैन दद्दू) । दिगम्बर जैनाचार्य परम पूज्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मार्ग पर चलना कठिन नहीं है, निर्णय करना कठिन है।
आचार्य श्री ने कहा – “9 मार्ग पर चलना कठिन नहीं है; निर्णय करना कठिन है, संकल्प करना कठिन है, दृढ़ता कठिन है, लक्ष्य के प्रति एकाग्रता कठिन है।” विपत्तियां आ सकती हैं, संकट आ सकते हैं, विघ्न-बाधाएं हो सकती हैं, परन्तु जो दृढ़ है वह संकटों में दुःखी नहीं होता, अपितु दृढ़ता के साथ उत्साह पूर्वक लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
सही निर्णय, सही राह –
आचार्य श्री ने कहा कि आगे बढ़ने वाले ही मंजिल प्राप्त कर पाते हैं। सही निर्णय करो, सही राह पर चलो। जीवन में ऊँचाईयाँ प्राप्त करना है तो सहन करना सीखो। उचित निर्णय करना सीखो। सही निर्णय के बिना लक्ष्य नहीं मिलता। श्रमशील बनो, आलस छोड़ो।
सिद्धि की सीढ़ी –
गुरुदेव ने कहा कि तपस्वी, ज्ञानियों की संगति करो। बड़े-बड़े योगियों ने उपसर्ग सहन किए और सिद्धि को प्राप्त किया। सिद्धि होते ही लोकालोक में स्वयं ही प्रसिद्धि हो गई। पूज्यों से स्पर्धा मत करो, ज्येष्ठों के प्रति श्रद्धा रखो। ज्येष्ठों से ज्ञान प्राप्त करो, अनुभवशीलों से सलाह लो, विनयशील बनो, नम्रता पूर्ण जीवन जियो।
गुरुओं की शिक्षा शिष्यों को श्रेष्ठ बनाती है। गुरुओं की सेवा से ज्ञान की वृद्धि होती है। जो गुरुओं की सेवा करता है, उसे शीघ्र ही लोक में प्रसिद्धि प्राप्त होती है। प्रसिद्धि पाना है तो सिद्धि प्राप्त करो। सिद्धि चाहिए तो श्रद्धा जाग्रत करो। श्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता। अनुभव, अभ्यास और श्रम से शीघ्र ही कार्य की सिद्धि हो जाती है।अंत में गुरुदेव ने कहा कि जिनका आचरण पवित्र होता है, उनका ही जीवन मंगल है। सज्जनों के वचन ही मंगलाचरण हैं।