नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया

जिले में गठित 37 खण्डपीठों में न्यायालय में 2500 के लगभग व्यक्ति लाभान्वित हुए तथा कुल 9,87,77,575/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया

रतलाम 12 सितम्बर । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली (नालसा) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार आज 12/09/2026 (शनिवार) को नेशनल लोक अदालत का आयोजन ए.डी.आर. भवन, जिला न्यायालय रतलाम में माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष सुश्री नीना आशापुरे द्वारा मॉ सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया।
नेशनल लोक अदालत में सम्पूर्ण जिले में गठित 37 खण्डपीठों में न्यायालय में लंबित समझौता योग्य 2052 प्रकरणों मे से 1821 प्रकरणों का निराकरण किया गया। जिसमें 2500 के लगभग व्यक्ति लाभान्वित हुए तथा कुल 9,87,77,575/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया। उक्त लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा के 89 प्रकरणों का निराकरण कर 4,093,5000/- रूपये का अवार्ड पारित किया गया एवं ट्रेफिक चालान के 728 मामलों में कुल राशि 1,47,700/- रुपये जमा करवाये गये। उपभोक्ता फोरम के 05 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिनमें 19,37,252/- का अवार्ड पारित किया गया।
नेशनल लोक अदालत में प्रीलिटिगेशन (मुकदमा पूर्व) बैंकों/फायनेंस कंपनी एवं बी.एस.एन.एल. नगर निगम आदि के 4592 प्रकरणों में से कुल 1195 प्रकरणों का निराकरण कर 19308101/- रूपये की राशि जमा करवाई गई। जिसमें 1200 से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए।
नगर निगम रतलाम एवं अन्य नगर पालिका, परिषद के जलकर एवं संपत्तिकर के 568 प्रकरणों का निराकरण कर 1,38,57,0782/- (एक करोड़ अठलीस लाख सत्तावन हजार सात सौ वियासी) रूपये की राशि जमा करवाई गई। समाचार लिखे जाने तक नगर निगम के प्रकरणों का निराकरण/कलेक्शन का सिलसिला जारी रहा।
कलेक्टर कार्यालय रतलाम से प्राप्त जानकारी अनुसार राजस्व न्यायालय के के फौजदारी प्रकरण 172 एवं राजस्व प्रकरण 185 का निराकरण किया गया।
आज दिनांक को लीड बैंक मैनेजर के मार्गदर्शन में बैंक मैनेजर श्री हरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा आमजन को शुद्ध पेयजल के उद्देश्य से आर. ओ. कार्यालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रतलाम को भेंट किया गया।
आज दिनांक 12.09.2026 को आयोजित नेशनल लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब श्री रामजी गुप्ता, विशेष न्यायाधीश श्री रवीन्द्र प्रताप सिंह चुण्डावत, जिला न्यायाधीश- श्री निर्मल मण्डोरिया, श्रीमती बरखा दिनकर, श्री संजीव कटारे, श्रीमती श्वेता तिवारी, श्री आशीष श्रीवास्तव, श्री राकेश कुमार शर्मा, श्री राजेश नामदेव, सी.जे.एम. श्रीमती सपना भारती कतरोलिया, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड श्री अतुल यादव, यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड/एसीजेएम श्रीमती सपना शर्मा, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड एवं जिला रजिस्ट्रार-श्री अनुपम तिवारी, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड- सुश्री सपना कनोड़िया, श्री जितेन्द्र रावत, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड-श्रीमती रविना चौधरी, श्री बृजेश कुमार राजपूत, श्री विवेक माल, श्री अरूणसिंह ठाकुर, श्री प्रवेश काबरा, श्री मंगल परमार, सुश्री वैशाली चौहान, सुश्री रूपाली बिरला, सुश्री प्रीति राठौर, श्री लवनेश सहित समस्त न्यायाधीश उपस्थित रहे।
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर ए0डी0आर0 भवन में सजावट कर रंगोली बनाई गई। इस अवसर पर श्री नीरज पवैया- सचिव/न्यायाधीश- सुश्री पूनम तिवारी, जिला विधिक सहायता अधिकारी, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ रतलाम- श्री राकेश कुमार शर्मा, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री राकेश कुमार शर्मा, सचिव श्री चेतन केलवा, श्रीमती आशा शाक्यवार-लोक अभियोजन अधिकारी, एल.डी.एम श्री एम.एल. मीणा, रतलाम एवं समस्त बैंक मैनेजर एवं समस्त अधिकारी कर्मचारी, नगर पालिक निगम के अधिकारी/कर्मचारी, पक्षकारगण, न्यायालयीन अधिकारी/कर्मचारीगण, पत्रकारगण, पुलिस अधिकारी/कर्मचारी, बी.एस.एन.एल. विभाग के अधिकारी/कर्मचारी, डिप्टी चीफ अनिल शर्मा,एवं समस्त खण्डपीठों के अधिवक्ता सदस्यगण, पैरालीगल वालेंटियर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारीगण के द्वारा सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।

न्यायालय श्रीमती सपना शर्मा, रतलाम द्वारा पति-पत्नी को सकुशल घर भेजा
सफल कहानी – 01. (एक्स विरुद्ध वाय, नाम परिवर्तित) इस तथ्य का उत्कृष्ट उदाहरण है कि न्यायालय की सक्रिय एवं न्यायोचित पहल से, दीर्घकाल से लंबित मामलों में भी सौहार्दपूर्ण एवं न्यायसंगत समाधान प्रदान किया जा सकता है।
प्रकरण के संक्षेप तथ्य यह हैं कि उभयपक्ष वर्ष 2017 में परिणय सूत्र में बंधे थे, जिससे उन्हे दो संतानों की प्राप्ति हुई। तत्पश्चात, आपसी पारिवारिक मतभेदों तथा अभियुक्त के अन्य महिला से संबंधों की आशंका के फलस्वरूप आपसी विवाद इस स्तर पर पहुँच गया कि दोनों पक्ष पृथक हो गए। तत्पश्चात् फरियादी द्वारा वर्ष 2022 में अभियुक्त तथा अन्य परिजनो के विरूद्ध मारपीट, कूरता व आपराधिक अभित्रास संबंधि अपराधो के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवायी गई थी।
प्रकरण के तथ्यों के आलोक में न्यायालय द्वारा माह फरवरी में उभयपक्ष के मध्य संवाद स्थापित कर समझौते की संभावनाओं का अन्वेषण किया गया, तथा पुनः वैवाहित संबंध स्थापित करने की सम्भावना को तलाशने के लिये प्रेरित किया गया। उभयपक्ष की सकारात्मक प्रतिक्रिया के आलोक में, लोक अदालत के पूर्व आयोजित प्री-सिटिंग सत्र के दौरान विशेष काउंसलिंग संपादित की गई। इस प्रक्रिया में न्यायालय द्वारा सक्रिय भूमिका का निर्वहन करते हुए दोनों पक्षों को आपसी समझौते के माध्यम से विवाद के अंतिम निराकरण हेतु प्रेरित किया गया। निरंतर, संवेदनशील एवं प्रभावी परामर्श के सकारात्मक परिणामस्वरूप दोनों पक्ष पुनः एक साथ जीवन व्यतीत करने की सहमति पर पहुँचे, जिसके अनुपालन में फरियादी द्वारा अभियुक्त से विधिवत समझौता कर उक्त आर.सी.टी. प्रकरण में समझौता आवेदन लगभग छः माह पूर्व प्रस्तुत किया गया जिसका विधि अनुसार निराकरण करने हेतु न्यायालय द्वारा फरियादी को पुनः विचार करने हेतु छः माह का समय प्रदान किया गया था।
आज नेशनल लोक अदालत में उभपक्ष ने उपस्थित होकर व्यक्त किया गया कि उनके मध्य अब कोई विवाद नही है और वैवाहिक संबंध मधुर होकर वह एक साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करना चाहते है। इस प्रकार लोक अदालत के सार्थक प्रयासों तथा न्यायालय के सक्रिय न्यायिक हस्तक्षेप ने लगभग पाँच वर्ष के कटु अलगाव को विराम देते हुए एक विच्छिन्न परिवार को पुनः एकजुट करने में सफलता प्राप्त की और मध्य लम्बित प्रकरण को समझौते के आलोक में समाप्त किया।
उभयपक्ष द्वारा एक-दूसरे को माला पहनाई जाकर पुनः नवीन जीवन व्यतीत करने की शुभकामनाएं देकर माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रतलाम द्वारा रवाना किया गया। मध्यस्थता में पीठासीन अधिकारी एवं उभयपक्ष के अधिवक्ताओं द्वारा भी अहम भूमिका निभाई गई।

  1. न्यायालय श्री राजेश नामदेव, सप्तम, मोटर दावा दुर्घटना अधिकरण, न्यायालय, रतलाम
    मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण लगभग 03 वर्ष पुराना मामला न्यायालय में पेश किया गया। जिसमें आवेदकगण वरिष्ठ नागरिक है तथा उनके पुत्र की मृत्यु हो जाने से उभयपक्ष के मध्य राजीनामा होने के फलस्वरूप आवेदकगण को बीमा कंपनी द्वारा राशि 32 लाख रुपये प्रतिकर रूप में अदायगी बाबत् न्यायालय द्वारा नेशनल लोक अदालत में आदेश पारित किया गया।

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