पर्युषण के पांचवें दिन भक्ति में डूबा सीतामऊ, गूंजे भगवान महावीर के जयकारे

14 मंगलकारी स्वप्नों की बोलियों में श्रद्धालुओं ने लिया बढ़-चढ़कर धर्मलाभ, पहली बार हुआ भव्य श्रीसंघ पूजन

सीतामऊ (नयन जैन)। पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन भगवान महावीर स्वामी के जन्म वाचन का महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया। परम पूज्य साध्वीवर्या रत्नरिद्धि श्रीजी महाराज साहब एवं रत्नवृद्धि श्रीजी महाराज साहब आदि की पावन निश्रा में विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए।
प्रातःकाल से ही परमात्मा के अभिषेक एवं विभिन्न पूजन-विधियां श्रद्धालुओं द्वारा भक्ति-भाव के साथ संपन्न की गईं। श्री वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ की विशेष विनती पर साध्वी मंडल स्थानक भवन पहुंचा, जहां आयोजित प्रवचन सभा में भगवान महावीर स्वामी के जन्म प्रसंग का वाचन किया गया। इसके पश्चात उपाश्रय भवन में प्रवचन के माध्यम से कल्पसूत्र का वाचन हुआ।

साध्वीश्री ने बताया जन्म वाचन का महत्व
प्रवचन प्रभाविका साध्वी श्री रत्नरिद्धि श्रीजी महाराज साहब ने फरमाया कि भगवान महावीर स्वामी का जन्म वाचन महोत्सव केवल हर्ष और उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि उनके अहिंसा, संयम, तप, त्याग एवं आत्मकल्याण के संदेश को जीवन में उतारने की प्रेरणा देने वाला पावन अवसर है। कल्पसूत्र में भगवान महावीर के जन्म प्रसंग का वर्णन मिलता है तथा माता त्रिशला के 14 मंगलकारी स्वप्न भगवान के दिव्य जीवन के शुभ संकेत माने गए हैं।
उन्होंने कहा कि जन्म वाचन के माध्यम से हमें भगवान महावीर के जीवन एवं सिद्धांतों को स्मरण करते हुए अपने जीवन में संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

विभिन्न परिवारों ने लिया धर्मलाभ
महोत्सव की जाजम बिछाने, गणधर गौतमस्वामी परमात्मा को विराजमान करने एवं परमात्मा के मुख्य मुनिम का लाभ डॉ. अरविंद ओस्तवाल परिवार ने लिया। वहीं सहमुनिम एवं पालनाजी को घर पर बांधने तथा भक्ति करने का लाभ अरविंद कुमार पोरवाल ने प्राप्त किया।

पहली बार चरण पखारकर हुआ श्रीसंघ पूजन
सीतामऊ श्रीसंघ के इतिहास में पहली बार श्रीसंघ के श्रावक-श्राविकाओं के चरण पखारकर श्रीसंघ पूजन करने का लाभ शांताबाई सज्जनलालजी पोरवाल परिवार ने लिया। परिवार द्वारा श्रीसंघ के प्रत्येक सदस्य के प्रति साधार्मिक भक्ति, सम्मान एवं समर्पण की भावना के साथ श्रीसंघ पूजा संपन्न की गई।

साधर्मिक भक्ति का भी हुआ आयोजन
जन्म वाचन महामहोत्सव के पश्चात स्वामीवात्सल्य का आयोजन हुआ, जिसका लाभ पारसमल भंडारी परिवार ने लिया। आयोजन में सकल श्रीसंघ की सहभागिता रही तथा भगवान महावीर स्वामी के जयकारों और भक्ति से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
जन्म वाचन महोत्सव का संचालन अभय ओस्तवाल, सौरभ ओस्तवाल व पीयूष ओसवाल ने किया संचालन के माध्यम से कई स्तवन भी प्रस्तुत किये।

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