बच्चियों को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाने की पहल

रतलाम। हाट रोड कुरैशी मंडी में स्थित दारुल उलूम गौसिया लिल्बनात संस्थान (मदरसा गौसिया) में बालिकाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की गई। सैय्यद शोकत अली फ्यूचर फाउंडेशन की तरफ से शुरू किए गए इस केंद्र में बालिकाओं को सिलाई मशीनें भेंट की गईं। फाउंडेशन के डॉयरेक्टर सैय्यद मुख्तार अली ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चियों को शिक्षा के साथ-साथ सिलाई का हुनर सिखाकर उन्हें भविष्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है।
कार्यक्रम में मदरसे के संस्थापक मौलाना बिलाल अहमद निजामी, मौलाना जुल्फिकार किब्ला मिस्बाही, मौलाना अनवारुल हक अमजदी, मौलाना नजदीम, हजरत हाफिज मौलाना आसिफ निजामी, मौलाना सुहैल, हाफिज अकरम एवं हाफिज शब्बीर हसन, सामाजिक कार्यकर्ता रईस अहमद कुरैशी, अहमद नूर कुरैशी, जर्रार कुरैशी, हाजी शफी मुहम्मद कुरैशी, हाजी यूसुफ कुरैशी, सादिक कुरैशी एवं यूनुस भाई कुरैशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। अतिथियों ने इस पहल को बच्चियों के भविष्य के लिए उपयोगी एवं सराहनीय बताया। सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चियां अपना हुनर विकसित कर भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकेंगी और अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी।
विद्यार्थियों को किया गया पुरस्कृत
मदसरे के तरफ से अयोजित कार्यक्रम में सिलाई केंद्र के शुभारंभ मौके पर होनहार विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया गया। इस मौके पर मदरसे और मकतब के छ माही इम्तिहान में बेहतर प्रदर्शन करने कर पहला, दूसरा व तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों (बच्चों) को पुरस्कृत किया गया।
दरसे के संस्थापक मौलाना बिलाल अहमद निजामी ने कहा कि सैयद शौकत फाउंडेशन की तरफ से बच्चियों को सिलाई मशीनें पेश की गईं। इसका मक़सद बच्चियों को दीनी व दुनियावी तालीम के साथ हुनर सिखाकर उन्हें मुस्तक़बिल में ख़ुद-कफ़ील और ख़ुद-मुख़्तार बनाने की तरफ़ ले जाना है। उपस्थित समाजसेवियों व नागरिकों ने कहा कि बालिकाओं को तालीम के साथ हुनर से जोड़ने की यह कोशिश न सिर्फ़ एक बेहतरीन पहल है बल्कि उनके मुस्तक़बिल ( भविष्य) को मज़बूत बनाने की दिशा में एक क़ाबिले-तारीफ़ क़दम भी है।