सीतामऊ में दिखा तप का वैभव, कर्मों की जंजीरें तोड़ने वाले तपस्वियों का निकला भव्य वरघोड़ा

3 सिद्धितप, 2 लघु सर्वतोभद्र, 30 अट्ठाई व 15 छठ-अट्ठम सहित अनेक तपस्वियों की हुई भव्य अनुमोदना

सीतामऊ (नयन जैन)। आत्म जागृति चातुर्मास 2026 के अंतर्गत आयोजित तपस्या महोत्सव के अवसर पर गुरुवार को सीतामऊ नगरी में ऐतिहासिक रथयात्रा एवं भव्य वरघोड़े का आयोजन हुआ। 3 सिद्धितप तपस्वियों, 2 लघु सर्वतोभद्र तप, 30 अट्ठाई, 15 छठ-अट्ठम सहित अनेक तपस्वियों की तपस्या के सम्मान एवं अनुमोदना में निकले इस भव्य वरघोड़े में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
ऐतिहासिक वरघोड़ा आजाद चौक स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर से प्रारंभ हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पोरवाल मांगलिक भवन पहुंचा। मार्ग में श्रद्धालुओं ने तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए भक्ति एवं श्रद्धा का वातावरण बना दिया।
पोरवाल मांगलिक भवन में साध्वीवर्या रत्नऋद्धि श्रीजी महाराज साहब एवं साध्वी रत्नवृद्धि श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के प्रवचन हुए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीजी ने तपस्या के महत्व को प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि “दुनिया को देखने जाओगे तो धन के पीछे दौड़ने वाले अंबानी मिलेंगे, लेकिन सीतामऊ नगरी में आओगे तो कर्मों की जंजीरों को तोड़ने वाले तपस्वी मिलेंगे। क्रिकेट में देखोगे तो सबसे छोटे खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी मिलेंगे, लेकिन सीतामऊ में आओगे तो नन्हे-नन्हे अट्ठाई करने वाले बाल तपस्वी मिलेंगे। अस्पताल में रोगी मिलेंगे और थिएटर में भोगी मिलेंगे, लेकिन सीतामऊ में कर्मों की जंजीरों को तोड़ने वाले तपयोगी मिलेंगे।”
साध्वीजी ने तपस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “तप के सामने शौर्य चाहिए, माया के सामने समता चाहिए और देव-गुरु-धर्म पर श्रद्धा चाहिए।” उन्होंने तपस्वियों की अनुमोदना के स्वरूप उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को अपनी-अपनी धारणा के अनुसार प्रत्याख्यान भी करवाए। साथ ही स्वामी वात्सल्य में अन्न का अपव्यय नहीं करने का प्रत्याख्यान उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को करवाया। साध्वीजी ने तपस्या महोत्सव के आयोजन को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाने वाली समस्त युवा टीम का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में साधर्मिक भक्ति का लाभ प्रेमबाई सुंदरलालजी ओस्तवाल परिवार, देवराजजी गुलाबबाई राजगुरु परिवार तथा भेरूलालजी चंदाबाई राणावत परिवार, तितरोड़ वालों ने लिया।
कार्यक्रम का संचालन अभय ओसवाल ने किया। धर्मसभा को मूर्तिपूजक श्रीसंघ अध्यक्ष डॉ. अरविंद जैन एवं सकल जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अशोक जैन ने भी संबोधित किया।
तपस्या महोत्सव के समापन अवसर पर सकल जैन श्रीसंघ, केसरिया आदिनाथ ट्रस्ट मंडल, जहाज मंदिर ट्रस्ट मंडल, वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ एवं महिला मंडलों द्वारा सिद्धितप सहित समस्त तपस्वियों का अभिनंदन पत्र, शाल एवं श्रीफल भेंट कर बहुमान किया गया। साथ ही साधर्मिक भक्ति का लाभ लेने वाले तीनों लाभार्थी परिवारों का भी श्रीसंघ द्वारा बहुमान किया गया।
पूरे आयोजन के दौरान सीतामऊ नगरी का वातावरण तप, त्याग, संयम, भक्ति और अनुमोदना से ओतप्रोत रहा।

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