तपस्वियों का चल समारोह निकला

वर्तमान दौर में 36 उपवास का कठोर तप अनुमोदनीय – श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा

रतलाम 20 सितंबर। वर्तमान में समय में चारों तरफ दुकानें खुली पडी है। लोग रोज खाने-पीने होटलों में जाते है, ऐसे में अपने मन पर नियंत्रण करना बडा कठिन है। मासक्षमण तपस्वी प्रखर गंग ने 36 उपवास और मधुबाला गंग ने सिद्धी तप करके अपनी रसना पर विजय प्राप्त की है। कठोर तप आराधना से आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। इनसे प्रेरणा लेकर अन्य लोगों को भी आत्म जागरण करना चाहिए।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मधुबाला-दिलीपजी गंग के सिद्धी तप और प्रखर-अश्विन गंग द्वारा 36 उपवास की दीर्घ तपस्या की अनुमोदना की। उपस्थित श्रावक-श्राविकाआंे ने अनुमोदना स्वरूप तपस्वी की जय-जयकार का उदघोष किया।
धर्मसभा से पूर्व गणेश देवरी क्षेत्र से नगर मंे विशाल चल समारोह निकला। इसमें तपस्वी आकर्षक रथ में सवार होकर निकले। चल समारोह नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गया। धर्मसभा में प्रवर्तकश्री ने कहा कि जीवन में संस्कारांे का बहुत महत्व होता है। संस्कारों से ही तपस्या पूर्ण होती है। रतलाम चातुर्मास में 15 मासक्षमण तप हो चुके है। महासती चंद्रयशाजी मसा द्वारा 46 उपवास के प्रत्याख्यान लिए गए है और उनके भाव 61 उपवास करने के है। इनके अलावा अन्य तपस्वियों द्वारा भी मासक्षमण और अन्य तप आराधनाएं की जा रही है, जो धर्म के प्रति उनकी अनन्य आस्था की प्रतीक है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि नगर में प्रवेश के जैसे चारो दिशाओं में द्वार होते है, वैसे ही परमात्मा की वाणी और धर्म में प्रवेश के दान, शील, तप और भाव चार द्वार है। इनमें से किसी भी द्वार से प्रवेश करके जीवन को मंगलमय बनाया जा सकता है। कर्म निर्झरा के लिए दो तरह के तप सहयोगी होते है। बाहय तप शरीर से होता है और आभ्यंतर तप आत्मा से किया जाता है। इनके लिए भावांे की शुद्धि आवश्यक है। धर्म में प्रवेश करते समय कोई अपेक्षा नहीं होना चाहिए, केवल कर्म निर्झरा का भाव रखना चाहिए।
धर्मसभा के आरंभ में महासती स्वर्णाश्रीजी एवं महासती श्री कल्पनाजी मसा ने स्तवन प्रस्तुत किया। श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने तपोत्सव पर प्रकाश डाला। तत्पश्चात चातुर्मास आयोजन समिति एवं श्री संघ ने तपस्वियों का बहुमान किया। इस अवसर पर सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। संचालन रखब चत्तर ने किया। आभार आयुष गंग ने माना। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।

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