19 अक्टूबर को सुबह 10.51 तक अष्टमी, इसके बाद नवमी पूजन; 20 को दोपहर 12.51 तक नवमी, फिर विजयादशमी

  • पंचांग एवं शास्त्रीय मतों के आधार पर तिथियों की विवेचना
  • कन्या पूजन का दौर शुरू, आज महाष्टमी की महाआरती होगी

बड़ावदा (शिरीष सकलेचा)। शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी, महानवमी एवं विजयादशमी के पूजन को लेकर इस वर्ष पंचांगों और विद्वानों के मतों में अंतर सामने आया है। श्री सिद्ध विजय पंचांग के अनुसार महाअष्टमी तिथि 18 अक्टूबर रविवार सुबह 8.27 बजे से 19 अक्टूबर सोमवार सुबह 10.51 बजे तक रहेगी। इसके बाद महानवमी तिथि प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर मंगलवार दोपहर 12.51 बजे तक रहेगी। इस तिथि क्रम के आधार पर 19 अक्टूबर को अष्टमी के बाद नवमी पूजन तथा 20 अक्टूबर को दोपहर 12.51 बजे तक महानवमी पूजन का विधान बताया गया है। इसके उपरांत विजयादशमी के पर्व पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। शनिवार को नगर के श्री अम्बामाता मंदिर सहित अन्य गरबा पांडालों में भी कन्या पूजन के कार्यक्रम हुए जो नवमी तक चलेंगे। कन्या पूजन में बड़ी संख्या में कन्याओं की उपस्थिति देखी गई।अम्बा माता मंदिर पर रविवार को रात्रि 8 बजे खप्पर का आयोजन होगा। उसके पहले हवन होगा।अष्टमी की महाआरती होगी। मंगलवार को विजयदशमी पर्व मनाया जाएगा।

तिथि को लेकर पंडितों के मत….
यज्ञाचार्य पंडित कपिल पौराणिक के अनुसार, निर्णयसिंधु के प्रमाण “शारदीय महाष्टमी पूज्या नवमी संयुता सदा, सप्तमी संयुता नित्य शोक संताप कारणी” के आधार पर नवमी युक्त अष्टमी का पूजन श्रेष्ठ माना गया है। उनके मतानुसार 19 अक्टूबर सोमवार को महाअष्टमी पूजन करना शास्त्रसम्मत है। उन्होंने कुछ पंचांगों में रविवार को अष्टमी पूजन के उल्लेख पर भी अपनी असहमति व्यक्त की है।महानवमी पूजन मंगलवार दोपहर 12.51 तक करना बताया गया है।

वहीं, पंडित अंकित पौराणिक ने श्री सिद्ध विजय पंचांग की तिथि गणना के आधार पर बताया कि इस वर्ष अष्टमी और नवमी तिथियां दो-दो दिनों में व्याप्त होने से श्रद्धालुओं को दोनों तिथियों में पूजन का अवसर मिल रहा है। उनके अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी की समाप्ति के बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 20 अक्टूबर मंगलवार दोपहर 12:51 बजे तक रहेगी।
श्री विनायक ज्योतिष के पंडित निलेश मेहता के अनुसार, तिथि-विवेचना के आधार पर 20 अक्टूबर मंगलवार को दोपहर 12.51 बजे तक सूर्योदय व्यापिनी महानवमी का पूजन करना श्रेष्ठ है। इसके बाद विजयादशमी के अवसर पर शास्त्रीय परंपरा के अनुसार शमी पत्र पूजन, शस्त्र पूजन एवं विजय संकल्प जैसे धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में विजय मुहूर्त दोपहर 2.06 से 2.53 बजे तक रहेगा।

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