
जावरा। जैन धर्म में तप, त्याग और संयम का विशेष महत्व है। इसी गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाते हुए पेढ़ी ट्रस्ट के तत्वावधान में जैन पंचायती नोहरा, पीपली बाजार में नौ दिवसीय ओलीजी तपस्या का भव्य शुभारंभ हुआ। इस पुण्य आयोजन का लाभ उज्जैन के श्यामा जी – मनोहर लाल जी लोढ़ा परिवार द्वारा लिया जा रहा है।
तपस्या के शुभारंभ के साथ ही संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो गया है और श्रावक-श्राविकाओं में अपार उत्साह देखने को मिल रहा है।
161 तपस्वियों की आराधना
प्रथम दिवस कुल 161 तपस्वियों ने तप आराधना की, जिसमें –
- 58 तपस्वियों ने वर्ण तप: वर्ण तप के नियमानुसार निर्धारित वर्ण की सामग्री ग्रहण की जाती है। आज चावल के वर्ण की सामग्री ग्रहण की गई, कल गेहूं के वर्ण की सामग्री ग्रहण की जाएगी।
- 7 तपस्वियों ने उड़द तप तथा
- 96 तपस्वियों ने खारी तप की आराधना की।
तपस्वियों की धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा, समर्पण और संयम सभी के लिए प्रेरणादायी रही।
तप है आत्मशुद्धि का मार्ग
जैन धर्म में ओलीजी की आराधना आत्मशुद्धि, इंद्रिय संयम और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। यह तप आत्मानुशासन, त्याग और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को जैन धर्म की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।
सभी तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दृढ़ मनोबल और निर्विघ्न तप पूर्ण होने की मंगलकामना की गई।
सेवा का सम्मान
आज के सेवा कार्य में सहयोगी रहे राजेंद्र महिला मंडल एवं कुशल बहू मंडल का बहुमान लाभार्थी परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष टुकड़िया ने किया।
यह जानकारी ओलीजी संयोजक निलेश दसेड़ा और अशोक झामर ने दी।