
रतलाम 18 अक्टूबर । रतलाम जिले के ग्राम रिंगनोद निवासी किसान श्री दिलीप सिंह आंजना आधुनिक तकनीक और बेहतर परिवहन सुविधा का लाभ लेकर गुलाब की खेती में सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। एक बीघा क्षेत्र में पाली हाउस के माध्यम से डच गुलाब की खेती कर रहे श्री आंजना प्रतिदिन लगभग 40 से 50 बंच गुलाब का उत्पादन कर रहे हैं। उनके खेत से प्रतिदिन लगभग 800 गुलाब के फूल निकलते हैं, जिनसे उन्हें प्रतिदिन करीब 4 से 5 हजार रुपए की आय प्राप्त हो रही है।
श्री दिलीप सिंह आंजना ने उद्यानिकी विभाग की एकीकृत बागवानी मिशन योजना के माध्यम से 25 लाख रुपए का ऋण लेकर पाली हाउस स्थापित किया। उन्हें इस पर 12 लाख रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। पाली हाउस में गुलाब की खेती के लिए उन्होंने लगभग 12 लाख रुपए खर्च किए, जिस पर उन्हें 5 लाख रुपए की सब्सिडी मिली।
डच गुलाब की खेती से बेहतर हुई आय
श्री आंजना ने अपने पाली हाउस में डच गुलाब की प्रजाति लगाई है। वे गुलाब की खेती में ड्रिप सिंचाई का उपयोग करने के साथ जैविक खाद का प्रयोग करते हैं। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के कारण उन्हें लगातार गुलाब का उत्पादन प्राप्त हो रहा है। उनके द्वारा उत्पादित गुलाब के फूलों की मांग जयपुर सहित अन्य प्रांतों में है। वे अपने खेत से गुलाब के फूल विभिन्न बड़े शहरों और अन्य राज्यों में भेजते हैं।
8 लेन सड़क से परिवहन हुआ आसान
श्री आंजना बताते हैं कि पहले गुलाब की खेती करना उनके लिए काफी मुश्किल था, क्योंकि फूलों को समय पर बड़े शहरों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता था। उनके खेत के पास से 8 लेन सड़क गुजरने के बाद परिवहन की सुविधा बेहतर हुई है। अब गुलाब के फूल कम समय में बड़े शहरों तक पहुंच जाते हैं, जिससे फूल खराब होने की संभावना कम हुई है और बाजार तक समय पर उत्पाद पहुंच रहा है।
वे बताते हैं कि बेहतर सड़क संपर्क ने उनकी गुलाब की खेती को नई सुविधा दी है। अब वे अपने खेत से ताजा गुलाब जयपुर सहित अन्य शहरों और राज्यों के बाजारों तक आसानी से भेज पा रहे हैं।
श्री दिलीप सिंह आंजना की सफलता यह दर्शाती है कि आधुनिक कृषि तकनीक, शासकीय योजनाओं से मिलने वाली सहायता और बेहतर सड़क एवं परिवहन सुविधा का समन्वय किसानों के लिए खेती को अधिक लाभकारी और बाजारोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।