शास्त्रों में देव दर्शन तीर्थ यात्रा को मोक्ष दायिनी यात्रा कहा जाता है

जावरा (निप्र) । हमारे धर्म शास्त्रों में देव दर्शन तीर्थ यात्रा का बहुत बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। क्योंकि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जो सामाजिक समरसता के साथ साथ धार्मिक एवं आध्यात्मिक परम्पराओं का भी अनुशरण करता है।
हमारे धर्म शास्त्रों में देव दर्शन को मोक्ष दायिनी मार्ग बताया है इसलिए चार धाम तीर्थ यात्रा करने वाला व्यक्ति अपने कर्मों की निर्जरा कर पुण्य का अर्जन तो करता ही है किन्तु जो व्यक्ति उदार भाव से सकारात्मक सोच एवं पुरूषार्थ की भावना से अपने साथ अन्य व्यक्तियों को भी देव दर्शन तीर्थ यात्रा कराता है तो वह निश्चित रूप से एक देव गुरु भक्त एवं अध्यात्मिक होकर अपने मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर पुण्यपार्जन बन जाता है।
ऐसे ही धर्मनिष्ठ समाज सेवी उदारमना श्री मनोहरलाल दीपक कुमार व मुकुल सूरिया परिवार भीलवाड़ा ने जैनियों के महातीर्थ श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ भगवान आलोट मध्यप्रदेश की दो दिवसीय देव दर्शन तीर्थ यात्रा का उदार भाव से आयोजन किया जिसमें लगभग 250 सहधर्मी बन्धुओं व रिश्तेदार परिवार आदि ने धार्मिक निष्ठा से भाग लिया तथा आध्यात्मिकता से जुड़कर परमात्मा से जुड़ने का लाभ लिया। सुरिया परिवार के संयोजन में भीलवाड़ा से प्रारम्भ हुई देव दर्शन तीर्थ यात्रा श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के आध्यात्मिक दर्शन पुजन वन्दन कर पुनः भीलवाड़ा पहुंच कर समाप्त हुई।
श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ दर्शन यात्रा के लाभार्थीयो का निम्बाहैडा में श्री मनोहरलाल, पारसमल, कमलेश कुमार तरुण कुमार एवं पवन कुमार ढेलावत परिवार ने स्वागत बहुमान करने का लाभ लिया वहीं जावरा में सुजानमल सुधीर कुमार सचिन कुमार कोचट्टा व मिक्की बाफना परिवार ने स्वागत बहुमान का लाभ लिया।
वहीं श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ पेडी की और से तीर्थ के सचिव एवं ट्रस्टी श्री धरमचंद जैन एवं ट्रस्टी श्री गोतम ओस्तवाल ने देव दर्शन तीर्थ यात्रा कराने वाले लाभार्थी परिवार श्री मनोहरलाल दीपक कुमार व मुकुल कुमार सुरिया व जावरा के श्री सुजानमल कोचट्टा का मोतियों की माला शाल श्रीफल से सम्मान किया।। उक्त जानकारी वरिष्ठ पत्रकार सुजानमल कोचट्टा ने दी।

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