सांवलिया मंडी में महर्षि वाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास के साथ श्रद्धा पूर्वक मनाई गई

रतलाम । आज भील समाज ने ग्राम सांवलिया मंडी में महर्षि वाल्मीकि जयंती हर्षोल्लास के साथ श्रद्धा पूर्वक धूमधाम से मनाई गई । आदिवासी एकता परिषद, अखिल भारतीय भील समाज, जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस), आदिवासी छात्र संगठन ,महाराणा पूजा भील जन कल्याण संगठन, वीर एकलव्य आदिवासी सामाजिक सेवा संस्था रतलाम के संयुक्त तत्वाधान में वाल्मीकि जयंती मनाई गई।
इस अवसर पर शोभा यात्रा गांव के प्रमुख मार्गो से होती हुई कार्यक्रम स्थल पर धर्म सभा के रूप में समापन हुई जिसमें अतिथियों ने महर्षि वाल्मीकि ऋषि के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि वाल्मिक ऋषि का जन्म त्रेतायुग में तमसा नदी के किनार शरद पूर्णिमा को हुआ महर्षि वाल्मीकि का जन्म का नाम वालिया (रत्नाकर ) था । पौराणिक कथा के अनुसार आदि महाकवि वाल्मीकि ऋषि का जन्म लगभग 500 इस पुर्व माना जाता है। उनके जीवन की यात्रा बड़ी कठिन और संघर्षपूर्ण थी। यह एक खूंखार डाकू थे । एक बार जंगल में सप्त ऋषि अपने रास्ते से निकल रहे थे। तब उनको लूटने के लिए रोका गया । तब सप्त ऋषियों ने उन्हें समझा कर सत्य का बोध कराया और तपस्या करने को कहा गया। उन्होंने कठोर तपस्या करके वालिया से आदि कवि महर्षि वाल्मीकि बन गए । उन्होंने संस्कृत की भाषा में प्रथम महाकाव्य रामायण की रचना की और आदिकवि के रूप में देश दुनिया में विख्यात हुए। ऐसे महान विभूति को हम कोटि कोटि नमन करते हैं। मुख्य अतिथि मथुरा लाल डामर विधायक रतलाम ग्रामीण श्री कालू महाराज श्री देवचंद जी महाराज विशेष अतिथि बद्रीलाल कटारिया, रायचन कटारा,हरिचंद्र भाभर, दिनेश डामर , कमजीकटारा, जगदीश कटारा,समाजजन भगवानसिंह भाभर, रूपजी वसुनिया, हुरजी गोदा, बांटी चरपोटा,,सीताबाई, गीताबाइ भूरीबाई, कमलाबाई, सजनबाई समाजसेवी सुरतलालडामर आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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