
रतलाम, 29 अक्टूबर। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा ने गुरूवार को राग-द्वेष से दूर रहने का आव्हान किया। उन्होंने कहा किसी से राग मत करो, द्वेष भी मत करो और सदैव समभाव में जीने का प्रयास करो। ज्ञानी हंसकर कर्म भोगता है, तो अज्ञानी रोकर भोगता है। संसार की यही रीत है।
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि चातुर्मास में वे भी एक जगह रहते है, लेकिन दीपावली आते ही विहार की खुशी आती है। चूंकि राग दुख का मूल कारण है, इसलिए किसी से राग नहीं करना चाहिए। संबंध जुडना संयोग है, तो संबंधों का बिछुड जाना वियोग है। जितना संबंध जिसके साथ रहता है, वह समय आने पर छूट भी जाता है। ज्ञानी ये जानते है कि जो मिला है, वह कभी बिछडता ही है। ज्ञानी को संसार का स्वरूप भी पता होता है, कि जो आया है, वह जाएगा ही, इसलिए कभी किसी से राग नहीं करता।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि परमात्मा भी पहले राग को जीतने का प्रयास करते है। यदि कोई अपने जीत लेता है, तो वह दुनिया को जीत लेता है। राग जहां होता है, वहां शत्रु है और जहां शत्रु नहीं, वहां राग नहीं रहता। हम प्रत्येक द्रव्य से राग करते है। सबसे ज्यादा राग शरीर से होता है, जबकि धर्म से होना चाहिए। सम्यक दृष्टि वाले जो भी होते है, खुशी-खुशी कर्मों का कर्जा चुकाते है। समभाव जीवन जीने की सही कला है, जिसे ये आ जाती है, वह कभी दुखी नहीं रहेगा।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि प्रतिकूलता आने पर हम दुखी होते है और अनुकुलता आने पर खुश होते है। जबकि जीवन हो या मरण हो, निंदा हो या प्रशंसा हो ये भी स्थायी नहीं रहते। रक्त संबंधों में समानता नहीं होती, तो समाज में समानता कैसे मिल सकती है। दुनिया के नजरिए से चलने वाला सदैव दुखी रहता है, इसलिए अपने सिद्धांत पर स्थिर रहना सीखो। आज जो प्रशंसा कर रहा है, वह कल निंदा करेगा और आज जो निंदा करता है, वह कल स्तुति करेगा। ये समझ लिया, तो राग-द्वेष से उपर उठ जाएंगे। प्रवचन के आरंभ में सेवाभावी श्री दर्शन मुनिजी मसा ने पुच्छि सुणम के जाप कराए।
प्रवर्तकश्री ने तपस्वियों को अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान कराए। संचालन रखब चत्तर ने किया। इस दौरान प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा, महासती श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। प्रवचन में श्री धर्मदास जैन श्री संघ के सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।
संयुक्त जैन महिला मंडल ने लिया आशीष
मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार मंे गुरूवार को संयुक्त जैन महिला मंडल का 72 सदस्यीय दल आया। दल ने पूज्य प्रवर्तकश्री प्रकाश मुनिजी मसा के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद लिया। चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा मंडल का आतिथ्य सत्कार किया गया।