अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से दीक्षा दिवस के उपलक्ष में आचार्य प्रवर को मुनि कमलेश ने आदर की चादर अर्पित कर अभिनंदन किया




शंखेश्वर पद्मावती शक्तिपीठ। धर्म की बाहरी उपासना पद्धति को लेकर मानवीय रिश्तो की मधुरता में कमी आती है वह धर्म भी आत्मा के लिए अभिशाप बन जाएगा । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने पद्मावती शक्तिपीठ में आचार्य प्रवर राष्ट्रसंत श्री लेखेंद्र शेखर विजय जी के उन पचास वे दीक्षा जयंती पर व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म का मूल ही मैत्री और सद्भाव है सभी महापुरुषों ने एक स्वर में यही संदेश अपनाने का आह्वान किया ।
उन्होंने कहा कि देश काल परिस्थिति के अनुसार उपासना पद्धति ने अनादि काल से परिवर्तन होता आया है और होता रहेगा । राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश ने कहा कि उपासना करके धर्म की इतिश्री मान लेना अज्ञान दशा है उपासना पद्धति साधन है पालन करना मात्र धर्म नहीं है ।
राष्ट्रसंत ने कहा कि उपासना के बाद मैत्री करुणा वात्सल्य भाव की अभिवृद्धि होती है उसी का नाम धर्म है। आचार्य प्रवर श्री लेखेंद्र विजय जी ने कहा कि जो सभी आत्मा को समान मानता है वह किसी का कभी अना दर नहीं करता है ।
उन्होंने अपने अनुभव में मार्मिक संदेश कहा कि उपासना पद्धति को लेकर धर्म अखाड़ा बनाना नफरत और टकराव का माहौल बनाने वाला शैतान से भी खतरनाक है ।
अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से दीक्षा दिवस के उपलक्ष में आचार्य प्रवर को मुनि कमलेश ने आदर की चादर अर्पित कर अभिनंदन किया एवं स्वर्ण जयंती रतलाम में मनाने का अनुरोध किया ।
महासती अनंत गुना श्रीजी आदि ठाणा 7 मुनि कमलेश ठाणा 6 सभी ने गुणानुवाद किए दोनों राष्ट्रसंत का मधुर मिलन आचार्य प्रवर ने मुनि कमलेश चादर से सम्मानित कर आत्मीयता से गले लगाया समारोह स्थल मैं भक्तों के नयन छलक पड़े विशेष दीक्षा जयंती पर मुनि कमलेश सहित सभी साधु साध्वी जी ने मूर्तिपूजक परंपरा का नया ओगा समर्पित किया जैन एकता जिंदाबाद के गगनभेदी नारों से सभा स्थल गूंज उठा । राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश की भावना का सम्मान करते हुए आचार्य प्रवर ने दीक्षा स्वर्ण जयंती रतलाम में मनाने की सभी आगारो सहित घोषणा की ।