निमियाघाट/कोडरमा। अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता साधना महोदधि भारत गौरव उभय मासोपासी आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज निमियाघाट के सहस्त्र वर्ष पुरानी भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्न हरण चिंतामणि पारसनाथ जिनेंद्र महाअर्चना महोत्सव पर भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए।
अंतर्मना प्रसन्नसागरजी ने कहा कि जीवन में जो महत्त्व स्वास का है,समाज में, वही महत्व विश्वास का है। विश्वास जीवन की स्वास है विश्वास जीवन की आस है विश्वास जीवन की प्यास है दुनिया विश्वास पर टिकी है जब तक विश्वास है तब तक दुनिया है विश्वास उठा की दुनिया भी उठ जाएगी लोग कहते हैं पृथ्वी शेषनाग पर टिकी है लेकिन मैं कहता हूं की दुनिया से शेषनाग पर नहीं टिकी है अपितु हमारे तुम्हारे विश्वास पर टिकी है विश्वास सृष्टि की बुनियाद है श्रद्धा जीवन की नीव है जीवन की इमारत श्रद्धा और विश्वास के मजबूत पायोपर ही तो खड़ी होती है पति का पत्नी पर विश्वास है तो जीवन में खुशियां है यह विश्वास टूटा और जीवन नर्क बन गया बाप का बेटे में और बेटे का बाप में विश्वास है तो रिश्तो में मधुरता है मिठास है यह विश्वास उठा की जीवन मैं कड़वाहट आई मालिक का नौकर पर विश्वास ना हो तो व्यापार ठप हो जाए और नौकर का मालिक पर से विश्वास जाता रहे तो सेवा एक पीड़ा दाई भूत बन जाएगा यह विश्वास ही तो है कि मैं बोलता हूं और तुम चले आते हो तथा तुम कहते हो और मैं बोलना शुरू कर देता हूं ।
कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने उक्त जानकारी दी ।