निमियाघाट/कोडरमा-अहिंसा संस्कार पदयात्रा के प्रणेता साधना महोदधि भारत गौरव उभय मासोपासी आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज निमियाघाट के सहस्त्र वर्ष पुरानी भगवान पारसनाथ की वरदानी छांव तले विश्व हितांकर विघ्न हरण चिंतामणि पारसनाथ जिनेंद्र महाअर्चना महोत्सव पर भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए।
आचार्य प्रसन्न सागर ने कहा कि घर भी एक तीर्थ है अपने घर को तीर्थ जैसा पवित्र बनाएं जीवन पवित्र बनेगा तो ही जीव तीर्थंकर बनेगा सारे दिन में कुछ समय भीड़ से हटकर एकांत में अकेले में बैठिए अंदर से हर पल एक आवाज आती है उसे सुनिए तुम्हारे घर में दीवार घड़ी होगी वह दिन भर चलती है उसके चलने की आवाज आती है पर तुम्हें सुनाई नहीं देती क्योंकि दिन में शोर-शराबा रहता है मगर जब रात का सन्नाटा होता है तो घड़ी के चलने की आवाज गूंजती है तुम्हारे भीतर से भी एक आवाज आती है उसे सुनने के लिए भीड़-भाड़ से दूर हट कर किसी शांत और एकांत में बैठिए और फिर उसे सुनिए आवाज तुम्हारे प्रभु की है जो तुम्हें टेर रहा है जो तुम्हें आवाज दे रहा है कि मेरे बच्चे तू कब तक मुझसे दूर रहेगा तू कब तक मुझे पीठ दिए रहेगा अब तो मेरे पास आजा देख समय बीतता जा रहा है सुबह ब्रह्म मुहूर्त में प्रार्थना और ध्यान जरूर करें प्रार्थना से प्रभु प्रसन्न होते हैं ध्यान से ऊर्जा मिलती है ध्यान ऊर्जा है प्रार्थना प्राण है सुबह जब तक पूजा हो प्रार्थना ना कर ले तब तक मौन रहे हैं मौन नींद की तरह है नींद ताजगी देती है मौन भी ताजगी देता है सुबह तुम्हारा मन प्रार्थना से ही खुलना चाहिए । कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा, नवीन जैन ने उक्त जानकारी दी ।