तुष्टीकरण की नीति न्याय सिद्धांत की रक्षा में बाधक है वह अधर्म और पाप है- राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

अहमदाबाद साबरमती 14 जनवरी 2021 । विषमताओं और समस्याओं से मुक्ति मुक्ति दिलाने के लिए क्रांतिकारी विचारों का शंखनाद करते हुए सन्मार्ग प्रशस्त करना की धार्मिकता का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि ऐसे कार्यों में परमार्थ की भावना से किया जाता है तभी सार्थक होता है ।
मुनि कमलेश ने कहा कि विचारों की उर्जा सब में होती है एक राम की तरह सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग करते है और दूसरा रावण की तरह विध्वंस और विनाश के काम में लगाते हैं ।
उन्होंने बताया कि शहीद और आतंकवादी में जमीन आसमान का अंतर है शहीद रक्षा के लिए जान लुटाता है आतंकवादी दूसरों की जान लेने के लिए । आत्मावलोकन हमें कौन सी भूमिका निभानी है।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि तुष्टीकरण की नीति न्याय सिद्धांत की रक्षा में बाधक है वह अधर्म और पाप है । जैन संत ने बताया कि विचारों की उर्जा का सदुपयोग और दुरुपयोग हमारे हाथों में है किसी दूसरों को दोष ना दें।
सुधर्मा भवन के अंदर ज्ञान गच्छ गच्छाधिपति पंडित रत्न श्री प्रकाश मुनि जी के गुरु भक्तों ने मुनि कमलेश के क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित होकर कल और प्रवचन करने की विनती की यहां विराजने की विनती की तो दूसरी तरफ मूर्तिपूजक आचार्य 15 जनवरी पर होने वाली दीक्षा में पधारने का अनुरोध किया मूर्तिपूजक आचार्य हेमचंद्र आचार्य संस्था की ओर से कल स्वर्ण लिखित आगम भेंट करके अभिनंदन किया सक्रांति पर पूरे देश के 18 राज्यों में अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच ने दिल्ली के हजारों कार्यकर्ताओं ने गौ सेवा मानव सेवा का लाभ लिया।

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