नारी तू नारायणी एक स्वस्थ निरोगी संगठित परिवार की नींव जड़ है हर भारतीय नारी

रतलाम। महिला पतंजलि योग समिति मध्य प्रदेश पश्चिम जिला रतलाम के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन सिंधी गुरुद्वारा में आदरणीय जिला प्रभारी रश्मि राजे व्यास एवं युवा भारत के प्रांत प्रभारी प्रेम राम जी पूनिया की अध्यक्षता में हुआ।
जिसमें मुख्य अतिथि ब्रह्माकुमारी संस्था से आदरणीय सविता दीदी एवं सेना में अपनी सेवाएं देने वाली रिटायर्ड कर्नल आदरणीय रेवा जी शर्मा महिला सिंधी समाज के अध्यक्ष सपना जी गंगवानी महाराष्ट्र मुंबई से जिला सोशल मीडिया प्रभारी नेहा जी रही ।
मां सरस्वती जी की तस्वीर पर माल्यार्पण दीप प्रज्वलन मंत्रोच्चार से किया गया संचालन भारत स्वाभिमान ट्रस्ट महामंत्री जयश्री राठौर ने किया सरस्वती वंदना का गायन संगठन मंत्री श्रीमती अनीता जी जोशी की सुंदर प्रस्तुति कर सुंदर भजन की प्रस्तुति की गई ।
आदरणीय जिला प्रभारी रश्मि राजे व्यास दीदी द्वारा महिला पतंजलि योग समिति जिला रतलाम की 2 वर्ष मैं किए गए काल में लगाए गए ऑनलाइन योग शिविर एवं अन्य सामाजिक कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई आदरणीय सविता दीदी द्वारा ओम के महत्व एवं ध्यान विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया एवं रिटायर्ड कर्नल रेवाजी द्वारा मातृशक्ति में ऊर्जा का संचार किया गया सपना जी द्वारा नारी के महत्व एवं स्वाभाविक मुस्कान एवं नारी की ऊर्जा का महत्व बताया नेहा जी द्वारा सोशल मीडिया के कार्य में विस्तार एवं जिले में होने वाले अन्य कार्यों में सहयोग बात कही गई कार्यक्रम को सफल बनाने में राज्य संवाद प्रभारी आदरणीय पिस्ता यादव महिला पतंजलि योग समिति के महामंत्री मीना भावसार संगठन मंत्री सीमा वर्मा तहसील प्रभारी अरुणा डोडियार तहसील संगठन मंत्री अनिता जोशी तहसील महामंत्री श्रीमती मंजू टाक सोशल मीडिया प्रभारी राजश्री राठौर रही।
गुरु निष्ठ कर्मठ योग शिक्षिका श्रीमती विमलेश वर्मा जी द्वारा प्रजापिता ब्रह्माकुमारी बहन आदरणीय सविता दीदी को इंसुलिन प्लांट शुगर पौंधा भेंट कर सभी को पेड़ लगाए धरती मां का श्रृंगार कर प्रकृति पर्यावरण संरक्षण संवर्धन का संकल्प दिलाया।
आयोजन में विशेष तौर पर उपस्थित पतंजलि युवा भारत जिला प्रभारी विशाल कुमार वर्मा सोशल मीडिया पर नितेंद्र आचार्य ने समस्त व्यवस्थाओं को संभालकर महिला दिवस पर्व को सफल बनाया।
आयोजन की संपूर्ण जानकारी मिडिया प्रभारी श्रीमती कविता मुकेश नैनानी ने दी ।