अशोक मेहता, इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद्)
स्वतंत्रता के इस दौर में हर व्यक्ति कुछ ना कुछ कहने, करने और दिखाने के लिए स्वतंत्र है। जिसका जैसा दिमाग वैसा उसका काम। अच्छे दिमाग, कम दिमाग और बुरे दिमाग वाले भी हैं। में यहां पर चर्चा कर रहा हूं जब पॉजिटिव सोच होती है तो बहुत सुंदर देश और शहर बनते हैं। जब उनका निर्माण होता है तब यह ख्याल नहीं होता कभी कोई इन्हें तबाह भी कर सकता है। पहले कबिलो में एक दूसरे पर कब्जा करने का कारण होता था जब एक दूसरे को आपस में ही खतरा महसूस होता था। अमूमन वही स्थिति आज भी है। जिसका ताजा उदाहरण रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का है। कोई फर्क नहीं आया सोच में, बुद्धि में, नियत में। कोई मतलब नहीं निकला शांति शालीनता और सब्रता का। अच्छे भले सुंदर शहर मे अच्छी भली जिंदगी चल रही थी फिर वहां की सरकारों ने एक दूसरे के प्रति आपस में इतना बड़ा कदम उठाया जिससे तबाही का मंजर एक सुंदर शहर को झेलना पड़ा। बेचारे निर्दोष नागरिक आज अपने आप को कोष रहे होंगे क्यों हम इन देशो में है जो अत्यधिक तरक्की पसंद हुआ करते थे और बहुत ही सक्षम सुरक्षा के लिए आधुनिक हथियारों से लैस है। आज वही हथियार आपस में एक दूसरे के खिलाफ चल रहे हैं और जाने कितनी निर्दोष इंसानी जिंदगीयों की बलि चढ़ गई। कई ऐसे परिवार होंगे जिन्होंने बड़ी उम्मीदों से अपनी दुनिया बसाई होगी आज एक झटके में वे सड़क पर आ गए। कई अनाथ हो गए, कई बेकसूर होकर भी इस मानवीय विपदा के शिकार हो गए। कितना भी शांति का पाठ पढ़ले , जब फितरती दिमाग ताकतवर लोगों में आता है तो यह बर्बादी हमेशा देखने को मिलेगी।