रतलाम । न्यायालय श्रीमान तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश (श्रीमान लक्ष्मण कुमार वर्मा) रतलाम (म.प्र.) के द्वारा रतलाम जिले का अतिसंवेदनशील, बहुचर्चित प्रकरण में निर्णय दिनांक 10.06.2022 को अभियुक्तगण 1.सरदार अली पिता मुमताज अली उम्र 62 वर्ष नि. रावला गली ताल, 2. इरफान पिता चॉद खा मेवाती उम्र 36 वर्ष नि. मकनपुरा ताल 3. निसार पिता चॉद खॉ मेवाती उम्र 41 वर्ष नि. मकनपुरा ताल, 4. वसीम पिता अकरम खॉ मेवाती उम्र 34 वर्ष नि. काजीकुआ ताल 5. आरीफ पिता मोहम्मद हुसैन खॉ मेवाती उम्र 40 वर्ष नि. सरकारी हास्पीटल के सामने ताल, 6. अकरम पिता मो. हुसैन खॉ मेवाती उम्र 58 वर्ष नि. काजीकुआ ताल 7. युनूस खॉ पिता भूरू खां, उम्र 42 वर्ष नि. हास्पी टल रोड ताल, 8. इरफान खॉ पिता भुरू खॉ उम्र 40 वर्ष नि. नारायण मार्ग ताल 9. जुबेर पिता अजीज खान उम्र 32 वर्ष नि; काजीकुआ ताल 10. शहजाद पिता भुरू खॉ मेवाती उम्र 46 वर्ष नि. नारायण मार्ग ताल जिला रतलाम को धारा 302/149 भादवि में आजीवन कारावास एवं 100-100 रूपये के अर्थदंड, धारा 324/149 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100-100रू अर्थदंड, धारा 148 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100रू अर्थदंड, धारा 25(1-बी)(बी) आयुध अधि. में 2 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100रू अर्थदंड से दंडित किया गया। 11. साजिद उर्फ राशिद उर्फ भैय्या खॉ पिता हनीफ खॉ उम्र 31 वर्ष नि. कांजीवाडा ताल को धारा 302/149 भादवि में आजीवन कारावास एवं 100-100 रूपये के अर्थदंड, धारा 324/149 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100-100रू अर्थदंड, धारा 148 भादवि में 3 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 100रू अर्थदंड से दंडित किया गया।
अभियोजन कार्यालय रतलाम के मीडिया सेल प्रभारी श्री चौपसिंह ठाकुर ने बताया कि दिनांक 13.04.2012 को फरियादी मेहरबान अली, सिकंदर अली, बीजेपी पार्षद खत्तुलाला उर्फ मुबारिक तथा उसका भतीजा शाहरूख खान ताल से दो मोटरसायकिलों से ताल फंटे पर चाय पीने गये थे। चाय पीने के बाद मृतक खत्तुलाला व मृतक शाहरूख खान एक मोटरसायकिल पर तथा फरियादी मेहरबान एवं साक्षी सिकंदर दूसरी मोटरसायकल से शाम लगभग 5 से 6 बजे के बीच ताल फन्टे से वापिस ताल जा रहे थे। खत्तुलाला की मोटरसायकल आगे थी व फरियादी की मोटरसायकल पीछे चल रही थी। जब वह लोग एस. आर. पेट्रोल पम्प के पास पहुचे, तभी ताल तरफ से एक लाल रंग की टवेरा कार तथा दो मोटरसायकल पल्सर व स्पलेंडर से 15 आरोपीगण 1. युनुस खां पिता भूरू खां, 2. शेहजाद पिता भूरू खां, 3. इरफान पिता भूरू खां, 4. भूरू खां पिता हुसैन खां, 5. युसुफ पिता हुसैन खाँ, 6. अकरम खां पिता हुसैन खां, 7. आरिफ खां पिता हुसैन खां, 8. वसीम पिता अकरम खां, 9. जुबेर पिता अजीज खां, 10. साजिद खां पिता हमीद खां, 11. निसार खां पिता चांद खाँ, 12. इरफान पिता चांद खां, 13. अनवर खां पिता मुमताज अली, 14. सरदार अली पिता मुमताज अली, 15. मुबारिक कालिया हाथ में तलवार, कट्टे व चाकू लेकर आये व सभी लोग कहने लगे आज इन सभी को जान से खत्म कर दो, सबसे पहले आरोपी युनुस खां ने मृतक मुबारिक खां उर्फ खत्तुलाला के गर्दन पर तलवार मारी, जिससे खत्तुलाला गाड़ी से नीचे गिर गया। फिर आरोपी शहजाद खां ने शाहरूख खाँ के गर्दन पर तलवार मारी, फिर सभी आरोपीगण फरियादी व साक्षी सिकन्दर को तलवार से मारने दौड़े, जिसका उन्होंने बचाव किया। परंतु फरियादी के हाथ, पीठ व हाथ के अंगूठे पर चोंट लगी तथा सिकन्दर के पीठ व बांये हाथ पर चोंट आयी। आरोपीगण निसार खां, इरफान खां ने कट्टे से फायर किया। एक गोली खत्तुलाला को लगी तथा शेष आरोपीगण उन्हें घेरकर मारने के लिये खड़े हो गये थे। तभी सिकन्दर चिल्लाने लगा तो वहां से जा रहे साक्षी बद्रीलाल राठौर, अमरसिंह सिसौदिया, इसरार अली व मनीष वहां आ गये। इन सभी को देखकर आरोपीगण अपनी गाड़ियों से वापस ताल तरफ भाग गये थे। फिर खत्तुलाला उर्फ मुबारिक अली व शाहरूख खान को ट्रेक्टर में डालकर ताल अस्पताल लेकर गये थे, जहां पर चिकित्सक द्वारा उन दोनों की मृत्यु होना बताया था। इस प्रकार सभी आरोपीगण ने एकमत होकर ताल पशुहाठ के ठेके के विवाद के चलते बीजेपी पार्षद मुबारक उर्फ खत्तुलाला व उसके भतीजे शाहरूख खान की हत्या कर दी और मेहरबान अली तथा सिंकन्दसर अली के साथ मारपीट की।
पुलिस ने मौके पर पहॅुचकर सूचनाकर्ता मेहरबान अली की सूचना पर देहाती नालसी दर्ज की गई थी तथा आरोपीगणो को गिरफ्तार कर अनुसंधान उपरांत अभियोग पत्र धारा 302, 147, 148, 149 भादवि एवं 25, 27 आर्म्स एक्ट न्यायालय में पेश किया गया था।
लगभग 10 साल चले इस मामले में अभियोजन द्वारा 23 गवाहो का परीक्षण कराया गया है, तथा लगभग 79 दस्तावेज तथा 21 आर्टिकल न्यायालय में प्रमाणित कराये गये। इस उक्त प्रकरण में न्यायालय द्वारा सुनवाई पूरी कर 11 आरोपीगण को दोषसिद्ध किया गया। विचारण के दौरान 4 आरोपीगण मुबारिक उर्फ कालिया पिता मोहम्मद हुसैन, अनवर अली उर्फ अनवर मुर्शी पिता मुमताज, युसुफ पिता मोहम्माद हुसैन खां और भुरू खां उर्फ भुरू कबाडी की मृत्यु हो गई थी। विचारण में आरोपी शहजाद, भुरू खां, इरफान खां, अकरम खां, वसीम एवं जुवेर द्वारा न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखा गया कि ये सभी घटना दिनांक को शाम 05:30 बजे निम्बाहेडा जिला चित्तोड राजस्थान में थे। उनका किसी ईशाक खां के व्यक्ति के साथ झगडा हुआ और निम्बाेहेडा पुलिस ने उन्हेा 07:00 – 07:30 लॉकअप में बंद कर दिया जहां वह पूरी रात बंद रहे। दूसरे दिन दिनांक 14.04.2012 को धारा 151 दप्रस. का प्रकरण बनाकर इन्हेर निम्बाहेडा में एसडीएम. कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हे निम्बाहेडा उपजेल भेजा दिया गया जहां वह दिनांक 16.04.2012 तक निरूद्ध रहे। आरोपीगण के इस तर्क का अभियोजन द्वारा समुचित जबाव दिया गया। फलत: न्या्यालय द्वारा आरोपीगण के ”प्ली ऑफ ऐलीबी” के बचाव को अमान्य कर दिया गया और उन्हे् आजीवन कारावास से दण्डित किया गया। प्रकरण में अभियोजन की तरफ से उपसंचालक/ जिला अभियोजन अधिकारी रतलाम द्वारा पैरवी की गई।