
रतलाम । आज के युग की और निगाह उठा कर देखते है तो पता चलता है की हम कँहा जा रहे है, हम अपने समय को सफल कर रहे है या विफल कर रहे है।
Time is money समय की कीमत को समझो । समय का न रूप है न रंग है न आकार है न प्रकार है लेकिन जो इसे जान लेता है समझ लेता है वो महावीर बन सकता है। गीता बाइबिल जैसे डायमंड ग्रंथ उत्तराध्ययन सूत्र में भगवान महावीर ने 36 / 36 बार समझाया है की समय का क्षण भर भी प्रमाद मत कर समय अनमोल है।
व्यक्ति लौट कर आ सकता है, खोई हुई वस्तु मिल सकती है, कैकई राम को वापस बुला सकती है, लेकिन जो क्षण बित गया वो लौट कर नही आ सकता है।
पहले महिलाएं सुबह 4 बजे से घर के काम काज में लग जाती थी तो रात तक काम में व्यस्त रहती थी, अब सब साधन सुविधा नौकर चाकर होने से लगभग 4 से 5 घण्टे का खाली समय मिलता है, जिसमें वे मोबाइल, व्हाट्सअप, शोशयल मीडिया, दोपहर की नींद अड़ोसी पड़ोसी से घर घर की कहानी इन सब बातों में व्यर्थ कर देते है, जबकि परमात्मा ने एक क्षण भी व्यर्थ गवांने से मना किया है।
एक प्रण कर लो दिन भर में जितना समय मोबाइल में दोगे उतना ही समय धर्म ध्यान में देंगे या जितना समय धर्म ध्यान में देंगे उससे कम समय मोबाइल में देंगे। यदि धन को इन्वेस्ट करना आपके हाथ में है तो समय इन्वेस्ट करना भी आप ही के हाथ में है।
बलशाली व्यक्ति अपने बल का घमंड करता है। लेकिन एक छोटा सा घांस का तिनका हवा के सहारे उस बलशाली व्यक्ति की आँख में चला जाए तो वह व्यक्ति तिलमिला उठेगा ।
बचपन में समय होता है लेकिन समझ व शक्ति नही होती है। जवानी में समझ व शक्ति होती है लेकिन समय नही होता है बुढापे में समय भी होता है समझ भी होती है लेकिन शक्ति नही होती है । इसलिये जवानी में समय निकालकर जितना पुण्य कमा सकते हो कमा लो बाद में चाहकर भी कुछ नही कर पाओगे।
यह सारगर्भित प्रवचन पूज्या श्री शतावधानी गुरु कीर्ति जी मसा ने प्रदान किये।
नवदीक्षिता पूज्या श्री अरुण कीर्तिजी मसा ने फरमाया की
इस दुनिया से हमने लिया ज्यादा है या दुनिया को दिया ज्यादा है । जन्म से ही लेते ही आ रहे है, माता पिता से, गुरु से संघ समाज से पेड़ पौधे से चाँद सूरज से सबसे लिया ही तो है, फिर हम किस बात का घमण्ड करते है। दान शील तप पुण्य इन सबके द्वारा जितना हो सके अपनी पुण्यवानी बढाते रहो, एक वक्त ऐसा आएगा जब बिस्तर में लाचार हो जाओगे तब चाहकर भी पुण्य नही कमा पाओगे। जितना पुण्य बढ़ाओगे जीवन उतना अच्छे से गुजरेगा जितना पाप बढ़ाओगे उतना दुखी होना तय है।