अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्टी सम्पन्न

रतलाम । अखिल भारतीय साहित्य परिषद की मासिक गोष्टी में गुड़गांव से पधारे भारत के लब्ध प्रतिष्ठित कवि एवम साहित्यकार श्री यशपाल पाल सिंह यश ने श्री मद्भागवत गीता के सरल दोहों में समाहित अपने चिंतन और दर्शन से गोष्टी को अध्यात्मिक ऊंचाईयां प्रदान की । कुछ दोहे जो श्रोताओं के मानस पटल पर अंकित हुवे वे थे
गुरु द्रोण और भीष्म है ,
पूज्य मेरे श्रीमान
हे मधुसूदन किस तरह
छोंण इन पर बाण ।
अविनाशी है आत्मा , मिटता सिर्फ शरीर
फिर क्यूं मरने से डरे
युद्ध करो तुम वीर ।
अपने नवीन काव्य संग्रह
जीवन गरम चाय की प्याली
से कुछ चुनिंदा रचनाएं सुनाकर जावरा के सुधि श्रोताओं के मन में और भी बहुत कुछ सुनने की प्यास जगाई । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रतलाम के हास्य व्यंग्य के हस्ताक्षर श्री जुझारसिंग भाटी ने भी अपने व्यंग्य बाणों से श्रोताओं का दिल जीत लिया । अतिथियों द्वारा मां शारदे का पूजन अर्चन कर भाटी जी की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया ।
आभासी दुनिया से आत्मीय मित्रता की मिसाल बनी उक्त गोष्टी में डॉक्टर प्रकाश उपाध्याय ने अतिथि परिचय के साथ अपने मधुर गीतों से गोष्टी में मिठास घोली । राजेंद्र श्रोतीय ,फजल हयात ,रतनलाल उपाध्याय ,हरिओम बरसोलिया ,चारू श्रोतिय ,दिलीप सेठिया ने भी अपनी गजलों एवम गीतों से आयोजन में चार चांद लगाए । कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो अवध नारायण पालीवाल ने की ।अतिथियों का स्वागत अभिनंदन संस्था केश्री बाबूलाल नाहर एवं संस्था अध्यक्ष संतोष मेढ़तवाल ने किया ।
कार्यक्रम में उमेश अरोड़ा एवम रामचचलानी ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी ।
कार्यक्रम का कुशल एवम गीतात्मक संचालन संस्था सचिव मनोहर मधुकर ने किया ।आभार श्री कनकमल कांठेड़ ने किया गोष्टी में प्रो सुरेश मेहता,आई. पी. त्रिवेदी ,अनिल पामेचा, श्रीमती कांठेड़ ,डॉक्टर ज्योति उपाध्याय , रोशन खंडेलवाल ,ने अपनी उपस्थिति प्रदान की ।

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