अंतर मन में उठने वाली इच्छाओं का विरोध करना ही सबसे महान तप है – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

मंदसौर जीवा गंज 6 अगस्त 2022 । उपवास करने से भी अनंत गुना ज्यादा कठिन है भोजन पर बैठकर उस पर नियंत्रण करना अपने आप में महान तपस्या है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने तपस्वी घनश्याम जी के मास खमण अभिनंदन समारोह की पूर्व संध्या को जैन दिवाकर प्रवचन हाल में संबोधित करते कहा अंतर मन में उठने वाली इच्छाओं का विरोध करना ही सबसे महान तप है। उन्होंने कहा कि अनंत जन्मों के कर्म तपस्या की ज्वाला में समाप्त होकर आत्मा निर्मल और पवित्र बनती है। मुनि कमलेश ने बताया कि रोगों से मुक्ति पाने के लिए तपस्या अपने आप में रामबाण औषधि है आयुर्वेद में उपवास को तप के रूप में स्वीकार किया है ।
राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि विश्व की खाद्य समस्या तपस्या द्वारा अनाज को बचाकर हल किया जा सकता है भूख से मरने वालों की संख्या कम है ज्यादा खाकर मरने वालों की संख्या ज्यादा है।
जैन संत ने कहा कि तप के द्वारा अनेक प्रकार की सिद्धियों प्राप्त हो सकती है विश्व के महापुरुषों ने तक को स्वीकार किया है और धर्म का आधार बताया है गौतम मुनि जी ने मंगलाचरण किया तपस्या अक्षत मुनि की आज पांचवा उपवास7 अगस्त को प्रातः अभिनंदन समारोह में विधायक यशपाल जी सिसोदिया जिलाधीश गौतम सिंह जी जिला पुलिस अधीक्षक सुजा नियाजी समारोह की शोभा बढ़ाएंगे भैरू सेवक के 25 वा उपवास है रेनू खटोड़ सीमा नाहर नोवा उपवास विजय खटोड़ ने सभा का संचालन किया।

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