शहर की राजनीति में काला दिन – पारस सकलेचा

कांग्रेस पार्षदो का अलग शपथ समारोह, समन्वय तथा सामंजस्य की राजनीति का युग समाप्त

रतलाम । शहर की राजनीति में काला अध्याय की शुरुआत हो गई है , समन्वय तथा सामंजस्य का युग समाप्त हो गया है । नगर विधायक के अनावश्यक हस्तक्षेप ने प्रशासन को कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों का अलग-अलग शपथ समारोह आयोजित करने को विवश कर दिया है । यह आरोप रतलाम के पूर्व विधायक एवं पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने लगाया ।
सकलेचा ने जारी बयान में कहा कि कलेक्टर महोदय स्पष्ट करे की , कांग्रेस और भाजपा पार्षद गण का अलग-अलग शपथ समारोह क्यो आयोजित किया गया ? तथा पूर्व मे तय शपथ समारोह में काग्रेस के विधायक एवं जिलाध्यक्ष हर्षविजय गहलोत तथा शहर अध्यक्ष महेंद्र कटारिया को अतिथि बनाकर आमंत्रित करने से किसके इशारे पर इन्कार किया गया ?
सकलेचा ने कहा कि अलग-अलग शपथ समारोह , शहर की राजनीति का काला दिन है । *पिछले 67 वर्षों में कोई भी विधायक रहा हो , किसी भी दल का स्थानीय शासन हो , शहर की राजनीति में समन्वय तथा आपसी सामंजस रहा है ।
विधायक जी ने आठ वर्षों में नगर निगम के कार्यों का खुद श्रेय लेने की होड मे , सारी मान्य परंपरा को तहस-नहस कर , शहर में राजनीतिक और प्रशासनिक अराजकता पैदा कर दी है ।
सकलेचा ने पूछा कि क्या शहर विधायक तय करेगा कि , शहर की कौन सी सड़क टू लेन बने , कौन सी सड़क फोरलेन बने , भवन और जमीन का नामांतरण कब हो , नलों में पानी कब आए , कहां फ्लाई ओवर ब्रिज बने , अमृत मिशन के 130 करोड़ से कौन सा कार्य हो , किस अवैध कॉलोनी में काम हो और किस में काम ना हो !
अगर यह सब विधायक तय करेगा तो महापौर और पार्षद गण क्या करेंगे ? क्या वे सिर्फ सड़क और नाली साफ करायेंगे ?
सकलेचा ने विधायक जी से अनुरोध किया है कि , नगर निगम के कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप ना करें , स्थानीय शासन के मुखिया आदरणीय महापौर जी तथा सम्माननीय पार्षद गणो को संवैधानिक अधिकार के साथ , स्वतंत्र रूप से कार्य करने दे । वरना अभी तो शपथ समारोह ही अलग अलग हुआ है, ऐसा ना हो कि नगर निगम परिषद की बैठक भी अलग अलग होने लगे ।

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