धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी के दर्शनार्थ एक दिवसीय दर्शन यात्रा निकाली

80 से भी अधिक दर्शनार्थी यात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल होकर प्रवर्तकश्री के मुखारविंद से लिए विभिन्न प्रत्याख्यान ग्रहण कर अभिभूत हो गए

रतलाम। जिसकी पुन्यवानी होती हैं ऐसे सामाजिक या समूह रूप में अपने सौजन्य से दर्शन यात्रा निकालने वाले विरले ही मिलते हैं। झाबुआ में विराजित आचार्यश्री उमेशमुनि जी के शिष्य एवं धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनि जी, अणुवत्सश्री संयतमुनि जी ठाणा 6 एवं पेटलावद में विराजित प्रवर्तकश्री की सांसारिक बहन पुण्य पुंज साध्वीश्री पुण्यशीला जी, चतुर्गुणा जी ठाणा 5 के दर्शनार्थ रतलाम से दर्शन यात्रा संघ निकाला।
बाल सखा का धर्म निभाकर प्रस्फुटित हुए
दर्शन यात्रा संघ के लाभार्थी प्रवर्तकश्री के सांसारिक बालसखा, समाजसेवी, पारणा समिति एवं संयमी आत्माओं की वैयावच्च में सदैव अग्रणी रहने वाले प्रकाशचंद्र नांदेचा दर्शन यात्रा निकालकर बाल सखा का धर्म निभाकर प्रस्फुटित हो गए। लाभार्थी नांदेचा ने दर्शनार्थी को तिलक लगाकर सामायिक उपकरण रखने का बैग भेंट किया। यात्रा प्रारंभ के पूर्व लाभार्थी नांदेचा का कांतिलाल कटारिया, जयंतीलाल जैन, दिलीप गेलड़ा, संजय मोदी, निर्मल गोखरू ने बहुमान किया।
जय जयकार से यात्रा हुई प्रारंभ
श्रमण भगवान महावीर स्वामी, उमेशाचार्य, आचार्य नानेश – रामेश, प्रवर्तकश्री, पुण्य पुंज आदि जयकारे के साथ रतलाम अलकापुरी से यात्रा प्रारंभ हुई। यह यात्रा सर्वप्रथम झाबुआ पहुंची। वहां जयंतीलाल घोड़ावत, अनूप घोड़ावत, रेणु घोड़ावत, अनुषा घोड़ावत, स्तुति घोड़ावत, मनस्वी घोड़ावत, कविता धम्मानी ने लाभार्थी नांदेचा का बहुमान कर दर्शन यात्रियों को प्रभावना भेंट की। वहां विराजित प्रवर्तकश्री एवं संत वृंद के दर्शन, मांगलिक, व्याख्यान आदि का लाभ लिया। तपस्वियों की अनुमोदना कर साधुवाद देते हुए यह तप कल्याणकारी बनने की कामना की। यहां प्रवर्तकश्री ने विशेष ज्ञान चर्चा के दौरान दर्शन यात्रियों को प्रेरणा रूप में फरमाया कि जो भी आराधना करे, नियमित करे और उसमें बढ़ोतरी करे। इस भव में आराधना करेंगे तो अगले भव में भी आराधना के भाव रहेंगे। धर्म करने से अच्छी गति मिलती हैं, शुभ गति का आयुष्य बंधता हैं। चारों गति में से मनुष्य गति से ही भव को सुधार सकते हैं। अंतिम मनोरथ संथारा संलेखना कर पंडित मरण से अगला भव भी सुधार जाता हैं। प्रवर्तक श्रीजी ने नियमित सामायिक करना, नवकार महामंत्र की माला गिनना आदि के विभिन्न पालन योग्य प्रत्याख्यान दिए। जिसे सभी ने सहज रूप में ग्रहण किए।
प्रवर्तक श्रीजी उत्कृष्ट संयम पालक
धर्मसभा में धर्मदास जैन श्रीसंघ सज्जनमिल क्षेत्र अध्यक्ष राजीव चौरडिय़ा ने कहा कि प्रवर्तक श्रीजी उत्कृष्ट संयम का पालन कर जिनशासन को दीपायमान कर रहे हैं। आपकी आराधना भी हर किसी के हृदय स्थल पर अनूठी मिसाल रूप में विद्यमान हैं। आपकी वात्सल्य रूपी प्रेरणा मात्र से हर कोई आराधना से जुड़ जाते हैं। दर्शन यात्रा के लाभार्थी की अनुमोदना करते हुए कहा कि पुण्यवानी होती तब कहीं जाकर दर्शन यात्रा निकालने का लाभ मिलता हैं। प्रवर्तकश्री के बाल सखा, अनन्य भक्त प्रकाशचंद्र नांदेचा ने नि:स्वार्थ दर्शन यात्रा निकालकर एक अनुपम पुण्य अर्जित किया हैं। जिनकी जितनी भी अनुमोदना करे कम होगी।
पूर्व में भी दर्शन यात्रा निकाली
प्रवर्तकश्री के प्रति बाल सखा के रूप में अटूट श्रद्धा रखने वाले नांदेचा द्वारा इस तरह की यात्राएं पूर्व में भी दाहोद, मेघनगर, पेटलावद, खाचरौद आदि स्थानों पर प्रवर्तक श्री के चातुर्मास के दौरान निकाली गई। स्मरण रहे श्रीनांदेचा ने भयावह कोरोना कॉल में भी लोगों की नि:स्वार्थ अविस्मरणीय, अतुलनीय सेवा दी। इस अवसर पर श्री चौरडिय़ा ने प्रवर्तकश्री से चतुर्विद संघ सहित रतलाम में वर्षावास करने की विनती की। जितेंद्र किरण मालू प्रतापगढ़ के अलावा रंगलाल चौरडिय़ा, मोहनलाल रुनवाल, प्रकाश रांका, श्रेणिक कटारिया, मेहता ने संयुक्त रूप में दर्शन यात्रियों को प्रभावना दी। झाबुआ से संघ पेटलावद रवाना होने के पूर्व श्रीधर्मदास जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष अशोक चतुर, मंत्री सोहनलाल रुनवाल, धर्मदास जैन श्रीसंघ सज्जनमिल क्षेत्र अध्यक्ष राजीव चौरडिय़ा, राजेश गादिया, मनोज लोढ़ा, कांतिलाल लोढ़ा ने लाभार्थी नांदेचा का शॉल माला से बहुमान किया। संघ ने पेटलावद पहुंचकर साध्वी वृंद के दर्शन, वंदन आदि का लाभ लिया। यहां पुण्य पुंज साध्वीश्री पुण्यशीलाजी ने दोपहर में आयोजित विशेष धर्मसभा में अन्तर्हृदय को छूने वाले तत्व ज्ञान एवं मित्रता दिवस पर फरमाया कि सच्ची मित्रता को निभाने के लिए बाल सखा “मित्र मुनिजी” के दर्शन के लिए संघ लेकर आए। हर व्यक्ति मित्रता चाहता हैं। दुनिया के बाजार में स्वार्थ के मित्र तो बहुत मिल जाएंगे। लेकिन सच्ची मित्रता ही जीव को आगे ले जाती हैं। दर्शन करना भी जीव को सम्यक्त्व की ओर आगे ले जाने वाला, बोधि ज्ञान बढ़ाने वाला हैं। भावना निर्मल होगी तो उतना आगे बढऩे का मार्ग मिलता जाएगा।
दर्शन यात्रियों का आभार माना
छोटे से निवेदन पर दर्शन यात्रा में शामिल दर्शनार्थियों के प्रति यात्रा के लाभार्थी प्रकाशचंद्र नांदेचा ने अन्तर्हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित कर आभार व्यक्त किया। दर्शन यात्रा में भंवरलाल डांगी, भूपेंद्र बांठिया, पुखराज चंडालिया, कमलेश आरती पटवा व लक्ष्य पटवा बदनावर, अविश मालू (सीए), संयम मालू प्रतापगढ़, म.प्र. जैन पत्रकार संघ प्रदेश सहसचिव दिलीप दरड़ा आदि सहित 80 से भी अधिक दर्शनार्थी शामिल हुए। इस मौके पर सभी दर्शनार्थियों ने लाभार्थी की जय जयकार कर बहुत बहुत अनुमोदना की।