कोटा (राज.)। श्री जैन दिवाकर पवन तीर्थ कोटा पर चातुर्मास हेतु विराजित उप प्रवर्तक श्री राकेश मुनि जी म. सा ने पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस पर सपने में नहीं हकीकत में जीना सीखो पर अपना उद्बोधन दिया ।
वर्तमान में मानव केवल और केवल सपनो में जी रहा है. सपने भी ऐसे संजोता है जिसे शायद इस जनम में पूरा न कर पाए. मानव जीवन का एक पल का भी भरोसा नहीं लेकिन योजना, सपने आदि ऐसे बनाते है जैसे अपने जीवन के बारे सब कुछ ज्ञात हो. इसलिए इन पर्युषण के दिनों में हम संकल्प धारण करे कि हम सपनो में नहीं हकिकत में जीने का प्रयास करेंगे और साथ ही पर्युषण पर्व के दिनों में ज्यादा से ज्यादा तप त्याग धर्म की आराधना के साथ जुडऩा चाहिए । इस अवसर पर महासती श्री श्यामा जी महाराज साहब के द्वारा अंतगढ़सूत्र का वाचन किया महासती श्री सुदर्शनाजी म. सा. ने कहा की जो आत्मा में बसा देता है वो होता है पर्युषण,और जो संसार मे बसा दे वो होता है प्रदूषण। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व आया है। इस पर्वाधिराज पर्युषण का मुहूर्त किसी ज्योतिषी ने नहीं बल्कि स्वयं त्रिलोकीनाथ ने निकाला है। जिसे हम बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाना है। जिनशासन की महिमा देखिए छोटे से छोटे बच्चे भी त्याग और उपवास की भावना भाते है। विदेशों में रहने वाले भी जैन समुदाय के लोग बड़े उत्साह के साथ इस पर्व को मनाते है देवलोक के देवता भी नन्दीश्वर द्वीप पर जाकर ये पर्व मनाते है।