आलोट । न्यायालय श्रीमान (सुनील कुमार) विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट आलोट जिला रतलाम के द्वारा अपने निर्णय दिनांक 13.09.2022 को अभियुक्त लाला उर्फ नाहरू उम्र 35 वर्ष नि. ताल जिला रतलाम को धारा 376 ए,बी, भादवि में 20 वर्ष कठोर कारावास व 5000रू. का अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
प्रकरण के पैरवीकर्ता विशेष लोक अभियोजक हैमेन्द्र कुमार गोयल ने बताया कि दिनांक 10.02.2019 को 4 वर्षिय अव्यस्क, अभियोक्त्री की माता ने थाना ताल पर उपस्थित होकर बताया कि मेरे पति से झगडा होने से मैं अपने पीहर बच्चों के साथ रह रही हॅू। इसी बीच मैंने दुसरी शादी करके अपने पति के साथ कुएं पर बनी झोपडी में रह रही थी। जहां पर लाला उर्फ नाहरू पिता बाबु खां मंसुरी आया और 4 वर्षिय अभियोक्त्री को गोदी में उठा लिया तो वह रोने लगी तो लाला बोला की चीज दिलाता हॅू, ऐसा कह कर उसे ले गया और करीब 20 मीनट बाद वापस आया तब अभियोक्त्री रोने लगी और अपने प्राईर्वेट पार्ट की और इशारा करते हुवे हाथ रखकर बोली की दु:ख रहा है। तब मैंने देखा की खुन निकल रहा था। उसके बाद मैंने लाला उर्फ नाहरू से पूछताछ की तब पता चला की उसने उसके साथ गलत काम किया है। और लाला उर्फ नाहरू द्वारा पैसों व बालिका का ईलाज कराने का लालच दिया गया था। उक्त घटना मैंने अपने पति और माता जी को बताई। उसके बाद मैं अपनी माता जी के साथ थाने पर रिपोर्ट लिखवाने आई ।
फरियादी द्वारा बाताई गई उक्त घटना पर से अभियुक्त के विरूद्ध दुषकर्म की धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया, विवेचना के दौरान पीडिता का मेडिकल कराया गया व साक्षीयों के कथन लिये गये। दिनांक 10.02.2019 को आरोपी लाला उर्फ नाहरू को गिरफ्तार किया गया तथा उसका भी मेडिकल एवं डीएनए कराया जाकर डीएनए रिपोर्ट प्रकरण में संलग्न की गई। आवश्यक अनुसंधान उपरांत दिनांक 14.03.2019 को अभियोग पत्र धारा 376 ए,बी, भादवि व 5/6 पॉक्सोंर एक्ट के अंतर्गत अभियुक्त लाला उर्फ नाहरू के विरूद्ध माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट में प्रस्तुत किया गया।
माननीय न्यायालय ने विचारण के दौरान महत्वपूर्ण साक्षीगण अभियोक्त्री के माता -पिता द्वारा घटना का समर्थन नहीं किया गया तथा घटना के संबंध में अभियोक्त्री भी मौन रही इस प्रकार उक्त महत्वपूर्ण साक्षीगण द्वारा घटना का समर्थन नहीं किया परंतु अभियोजन द्वारा वैज्ञानिक मेडिकल साक्ष्य व डीएनए रिपोर्ट तथा परिस्थिति जन्य एवं लिखित व मौखिक बहस कर अपराध को सिद्ध करते हुवें अधिकतम दण्ड से दण्डित किये जाने का तर्क प्रस्तुत किये गये।
माननीय विशेष न्यायालय द्वारा अपने निर्णय दिनांक 13.09.2022 को अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य को प्रमाणित मानते हुये अभियुक्त लाला उर्फ नाहरू को दोषसिद्ध किया गया । प्रकरण में शासन की ओर से सफल पैरवी विशेष लोक अभियोजक हैमेन्द्र कुमार गोयल द्वारा कि गई।