भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम भाषा है विचारों के आदान-प्रदान के लिए सशक्त माध्यम है – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

मंदसौर जीवा गंज 14 सितंबर 2022 । भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम भाषा है विचारों के आदान-प्रदान के लिए सशक्त माध्यम है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जैन दिवाकर प्रवचन हाल में हिंदी दिवस पर संबोधित करते कहा कि हिंदी भारत माता के सुहाग की बिंदी है । राष्ट्रीय एकता अखंडता में भाषा ऑक्सीजन से महत्वपूर्ण काम करती है सभी धर्म के साधना के मंत्रों का निर्माण हिंदी के माध्यम से हुआ है ।
उन्होंने कहा कि प्रांतीय भाषाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय भाषा हिंदी को बहू मान देना चाहिए अंग्रेजी से प्यार करना राष्ट्रीय भाषा के साथ सौतेला व्यवहार करना अक्षम्य अपराध है।
मुनि कमलेश ने बताया कि आज भी हम अंग्रेजी भाषा की मानसिकता के गुलाम हैं टूटी फूटी इंग्लिश बोलने में स्वाभिमान महसूस करते हैं और मातृभाषा हिंदी बोलने वाले को ही निगाह से देखते हैं बह देशभक्त नहीं हो सकता । राष्ट्र संत ने स्पष्ट कहा कि सरकार हिंदी दिवस मनाने का ढोंग करती है सरकारी सभी काम इंग्लिश में हो रहे हैं उनको हिंदी में चालू करके अपनी निष्ठा का परिचय दें । जैन संत ने बताया कि दैनिक जीवन की बोलचाल की भाषा में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करना अपनी संस्कृति में जहर घोलने के समान हैं भाषा का सम्मान ही देश और धर्म का सम्मान है । अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली द्वारा दक्षिण प्रांत में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए 5 अवार्ड प्रारंभ किए हैं कमल मुनि कमलेश पत्रकारिता कवि साहित्य आदि प्रदान किए जाते हैं मुनि जी ने मंगलाचरण किया घनश्याम मुनि ने विचार व्यक्त की दिवाकर मंच के 50 कार्यकर्ता का प्रतिनिधिमंडल मंदसौर पहुंचा गुरु दर्शन और मार्गदर्शन का लाभ लिया संचालन अजीत खटोड़ ने किया ।

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